जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने विशेष सशस्त्र बल में 650 से अधिक पदों पर निकली बैंड भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। मामले में भर्ती नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन करते हुए पूरा रिकॉर्ड पेश करने के साथ ही जवाब पेश करने के निर्देश सरकार को दिये है।
दरअसल यह मामला जबलपुर निवासी रणजीत सिंह ठाकुर और मंडला निवासी पवन पुट्टा की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया कि भर्ती नियमावली की कंडिका आठ के अनुसार एक पद के विरुद्ध तीन अभ्यर्थियों को स्किल टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। इस हिसाब से 650 से अधिक पदों के लिए करीब 2100 अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने केवल 1200 अभ्यर्थियों की सूची जारी की। याचिका में कहा गया कि सूची में एससी, एसटी और अनारक्षित वर्ग के कटऑफ अंक भी जारी नहीं किए गए।
कई अभ्यर्थियों के स्किल टेस्ट और वीडियोग्राफी होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। मामले में मीडिया रिपोर्टों के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवालों का भी उल्लेख किया। याचिका में पूरी प्रक्रिया की न्यायिक जांच और मूल रिकॉर्ड कोर्ट में प्रस्तुत कराने की मांग की गई है। जिस पर न्यायालय ने भर्ती का प्रकिया का परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई सितंबर माह में निर्धारित की है।
