
उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को नई गति देने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण पड़ाव आया। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं नवनियुक्त सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल ने आज विधिवत पदभार ग्रहण किया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वर्चुअल तौर पर कार्यक्रम से जुडक़र कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन स्वर्ग से भी सुंदर है।
पदभार ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और जगदीश अग्रवाल को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए सिंहस्थ की तैयारियों के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह में साधु-संत, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं को आकार देने की होगी। जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति को इसी दृष्टि से अहम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सिंहस्थ को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय उज्जैन की स्थायी धार्मिक एवं पर्यटन व्यवस्था को मजबूत करना है। यही वजह है कि मेला प्राधिकरण की भूमिका इस बार केवल मेले के दौरान व्यवस्थाएं संभालने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि संत समाज, प्रशासन और विकास एजेंसियों के बीच समन्वय की बड़ी जिम्मेदारी भी उसके सामने होगी।
करोड़ों श्रद्धालु, देशभर से आएंगे साधु-संत
सिंहस्थ-2028 उज्जैन में 27 मार्च से 28 मई 2028 तक प्रस्तावित है। आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही सिंहस्थ को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल बताते हुए तैयारियां समय से पहले पूरी करने पर जोर दे चुके हैं। सरकार की योजना श्रद्धालुओं के साथ-साथ देशभर से आने वाले साधु-संतों, महंतों, महामंडलेश्वरों और अखाड़ों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की है। सिंहस्थ की सबसे बड़ी विशेषता 13 अखाड़ों सहित विभिन्न परंपराओं के संत-महंतों का आगमन रहेगा। शाही स्नान, साधु-संतों के शिविर, धार्मिक प्रवचन, कथा, भागवत और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजन का प्रमुख आकर्षण होंगी।
संतों के लिए स्थायी आश्रम की योजना
सिंहस्थ की तैयारियों में इस बार साधु-संतों को लेकर दीर्घकालीन योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरिद्वार की तर्ज पर उज्जैन में साधु-संतों के लिए स्थायी धार्मिक नगरी और आश्रम विकसित करने की बात कही है। 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर, संत-महंत और प्रतिनिधियों के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की योजना भी सामने रखी गई है। पदभार ग्रहण के अवसर पर जगदीश अग्रवाल ने सिंहस्थ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी के सहयोग से काम करने की प्रतिबद्धता जताई। संत समाज की मौजूदगी में पदभार ग्रहण होने से यह संदेश भी गया कि सिंहस्थ की तैयारियों में साधु-संतों की अपेक्षाओं और सुझावों को स्थान दिया जाएगा।
12 को हुई नियुक्ति
राज्य शासन ने 12 अगस्त को जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया था। वे पूर्व में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। भाजपा संगठन में भी वे लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं और आपातकाल के दौरान मीसाबंदी भी रहे। उनके प्रशासनिक एवं राजनीतिक अनुभव को देखते हुए सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सिंहस्थ को लेकर तैयारियां पहले से चल रही हैं, लेकिन मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उनके पदभार ग्रहण के बाद इन तैयारियों को अब संस्थागत नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।
