भोपाल। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत भोपाल में करोड़ों रुपए खर्च कर कई बड़े प्रोजेक्ट तैयार किए गए। सड़कें, पार्किंग, स्मार्ट सुविधाएं और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की योजनाएं शुरू की गईं। लेकिन सवाल ये है कि इन योजनाओं का फायदा आम लोगों को कितना मिल रहा है?
हमारी तीन-पार्ट सीरीज के दूसरे हिस्से में हमने भोपाल के लोगों के बीच पहुंचकर जाना कि उनकी नजर में शहर की स्मार्ट सिटी कैसी है और उन्हें इन योजनाओं से क्या फायदा मिला।
लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट जरूर बना है, लेकिन अभी भी इसे पूरी तरह स्मार्ट बनने में काफी समय लगेगा। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद कई जगह सड़कों पर गड्ढे, स्ट्रीट लाइट और पर्याप्त रोशनी जैसी बुनियादी समस्याएं लोगों के लिए परेशानी बनी हुई हैं।
लोगों के मुताबिक, स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट और नई सुविधाएं नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं भी हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएं। सड़क, रोशनी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं में दिक्कत बनी रहने पर स्मार्ट सिटी की योजनाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस ग्राउंड रिपोर्ट में हमने सीधे भोपाल की जनता से बात की और जाना—क्या शहर वाकई स्मार्ट हुआ है या अभी भी स्मार्ट सिटी का सपना अधूरा है?
अब इस सीरीज के तीसरे और आखिरी पार्ट में जनता की बात और सवालों को लेकर नगर निगम के अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा।
