‘मेरा जीवन, मेरे अनुभव’ में अधिकारियों ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव

नीमच। नगर की अग्रणी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था कृति के महिला प्रकोष्ठ द्वारा ‘मेरा जीवन, मेरे अनुभव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस एवं शिक्षा विभाग से जुड़ी अधिकारियों ने अपने जीवन के संघर्ष, सफलता, नौकरी और परिवार के बीच सामंजस्य के अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी श्रीमती आशा सांभर एवं श्रीमती मंजुला धीर ने किया।

संस्था अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशासन के अलग-अलग विभागों में कार्यरत अधिकारियों के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक अनुभवों से रूबरू कराना है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के संघर्ष और अनुभव समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।

एएसपी हेमलता अग्रवाल ने बताया संघर्ष से सफलता तक का सफर

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती हेमलता अग्रवाल ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी गृह नगर गुना में रहकर ही की। वर्ष 2012 में उनका चयन हुआ, लेकिन उस समय पुलिस सेवा उनकी प्राथमिकता नहीं थी। बाद में दोबारा प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा को ही अपना लक्ष्य बना लिया।

उन्होंने बताया कि विद्यार्थी जीवन में उन्होंने पढ़ाई का खर्च न्यूनतम रखने का प्रयास किया, ताकि माता-पिता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। वर्ष 2014 में विवाह के बाद नौकरी और परिवार की दोहरी जिम्मेदारी सामने आई। शुरुआत में कठिनाइयां आईं, लेकिन पति और सास के सहयोग से परिस्थितियां सहज होती गईं।

उन्होंने बताया कि उज्जैन में नौकरी के दौरान समय सबसे चुनौतीपूर्ण रहा। छुट्टियां नहीं मिलने के कारण वह अपने डेढ़ वर्ष के बच्चे से सप्ताहांत में ही मिल पाती थीं। इस कठिन दौर में पति और सास ने उनका भरपूर सहयोग किया।

पुलिस और जनता के संबंधों को लेकर एएसपी ने कहा कि यदि पुलिस धैर्यपूर्वक आमजन की समस्याएं सुने और उनके समाधान का प्रयास करे तो जनता और पुलिस के बीच बेहतर संबंध बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में उनका यही उद्देश्य है।

इंजीनियरिंग से शिक्षा प्रशासन तक पहुंचीं ऐश्वर्या मूंदड़ा परवाल

जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती ऐश्वर्या मूंदड़ा परवाल ने बताया कि उनकी पहली पसंद इंजीनियरिंग थी। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब नौ महीने नौकरी भी की। नौकरी के दौरान उनकी बॉस ने उन्हें लगातार सीखने और पढऩे के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि जिस दौर में लड़कियों को सिविल इंजीनियर बनने के लिए हतोत्साहित किया जाता था, उस समय उनके पिता ने उनका पूरा साथ दिया। इंजीनियरिंग की नौकरी के दौरान उनका रुझान प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ा और उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की।

उनका चयन कोषालय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी दोनों पदों के लिए हुआ, लेकिन उन्होंने शिक्षा विभाग को चुना। उन्होंने कहा कि पुस्तकों से मिलने वाले ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है। रामचरितमानस उनकी प्रिय पुस्तकों में से एक रही है और इससे उन्हें जीवन में काफी प्रेरणा मिली।

उन्होंने बताया कि विवाह के बाद वह नीमच आईं और यहां उनकी तीसरी पदस्थापना है। नौकरी के साथ परिवार का सहयोग उनके लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों से मिले सहयोग के कारण नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाना सुखद अनुभव रहा है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आने को लेकर वह पहले असमंजस में थीं, लेकिन उनकी सास ने उन्हें कार्यक्रम में जाने के लिए प्रेरित किया। इसी कारण वह देर से ही सही, कार्यक्रम में शामिल हो सकीं।

डॉ. माधुरी चौरसिया ने की दोनों अधिकारियों की सराहना

कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्ञानोदय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया ने की। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए दोनों अधिकारियों की कार्यशैली और उनके संघर्षों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि परिवार और नौकरी के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना अपने आप में प्रेरणादायक है।

बड़ी संख्या में सदस्य और श्रोता रहे मौजूद

कार्यक्रम में कृति संस्था के सदस्य महेंद्र त्रिवेदी, भरत जाजू, राजेश जायसवाल, कमलेश जायसवाल, किशोर जेवरिया, डॉ. अक्षय पुरोहित, जीवन कौशिक, प्रकाश भट्ट, शरद पाटीदार, मुकेश कासलीवाल, ओपी सिंघल, सत्येंद्र सिंह राठौर, शैलेंद्र पोरवाल, पृथ्वीसिंह वर्मा, गणेश खंडेलवाल, कीर्तिकुमार चौधरी, कैलाश बाहेती, दिलीप दुबे, जम्बुकुमार जैन, विमल कुमार जैन, डॉ. वीके जैन, अनिल चौरसिया, राधेश्याम शर्मा, राजेंद्र परिहार, महेश शर्मा, रमेश मोरे सहित बड़ी संख्या में सुधी श्रोता मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती साधना सेवक ने किया, जबकि आभार संस्था के सचिव रघुनंदन पाराशर ने व्यक्त किया।

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