
बयान में कहा गया है, “हाल के सप्ताहों में, हमने अमेरिका के साथ दुनिया में सबसे बेहतर समझौते की स्थिति हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की थी। हालांकि, यह प्रगति कनाडाई लोगों के लिए हमारे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रही। इसलिए, आज (शुक्रवार) शाम मैंने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं को निलंबित करने का निर्णय लिया है और कनाडा के वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शर्तों में अंतिम समय पर किये गये बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक थे। इससे किसी भी संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गये।
श्री कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने शुक्रवार-शनिवार की आधी रात से लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के कनाडा के सामानों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “कनाडा अपने श्रमिकों और व्यवसायों की सुरक्षा के लिए इन आयात शुल्क का डॉलर-के-बदले-डॉलर आधार पर जवाब देगा।” कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में सरकार देश के श्रमिकों और उद्यमों की सहायता के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा करेगी। ये उपाय पिछले 18 महीनों में प्रदान की गयी लगभग 25 अरब डॉलर की सहायता के अतिरिक्त होंगे।
व्यापार वार्ताओं में कनाडा के उद्देश्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें कनाडाई उद्यमों के विशाल बहुमत के लिए अमेरिका में शुल्क-मुक्त पहुंच बनाये रखना; द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करना; कनाडा के प्रमुख रणनीतिक उद्योगों पर अमेरिकी आयात शुल्क में उल्लेखनीय कमी लाना; देश के एमएसएमई की रक्षा करना; और अपनी मजबूती, स्वतंत्रता और संप्रभुता बनाये रखना है, ताकि कनाडा के लोग अपनी इच्छानुसार देश का निर्माण जारी रख सकें।
श्री कार्नी ने कहा कि कनाडा की आर्थिक वृद्धि तेज हो रही है और अगले दो वर्षों में वह जी7 में दूसरी सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज करने की राह पर है। देश की अर्थव्यवस्था अमेरिका की तुलना में चार गुना तेज गति से रोजगार पैदा कर रही है। अगले दशक में गैर-अमेरिकी बाजारों में निर्यात के दोगुना होने की संभावना है। कनाडा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दो दशकों के उच्चतम स्तर पर है। कनाडा के निकटतम जी7 प्रतिस्पर्धी की तुलना में इसकी दर दोगुनी है। उन्होंने कहा, “कनाडा के पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है। और हम किसी भी देश को अपना भविष्य तय करने की अनुमति नहीं देंगे। हम अपना रास्ता खुद तय करेंगे और सभी के लिए एक मजबूत कनाडा का निर्माण जारी रखेंगे।”
