
जबलपुर। सिविल सूट के मामले में दायर प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता की तरफ से अधिवक्ता बदलने का फर्जी आवेदन पेश किया गया है। इसके अलावा अपील वापस लेने के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है। एकलपीठ ने इस संबंध में न्यायिक रजिस्ट्रार को जांच के आदेश जारी किये है। एकलपीठ ने न्यायिक रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है कि जांच में आपराधिक गतिविधि प्रतीक होती है तो पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाये। जिससे दोषियों को सजा मिल सके।
भोपाल निवासी शालिनी शर्मा की तरफ से भोपाल जिला न्यायालय द्वारा सिविल सूट के प्रकरण में 21 मार्च 2024 को पारित आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील दायर की गयी थी। प्रथम अपील पर विगत 14 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने एकलपीठ को बताया कि उन्हें याचिकाकर्ता की तरफ से अपील वापस लेने का कोई निर्देश नही मिला है।
एकलपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि अपीलकर्ता ने अधिवक्ता एस.पी. मिश्रा, फाल्गुनी यादव, जितेंद्र मोहन शर्मा के माध्यम से उक्त अपील दायर की थी। इसके बाद 5 अगस्त 2026 को अधिवक्ता एस.पी. मिश्रा की एनओसी के साथ अधिवक्ता अजय कुमार यादव को नियुक्त करने के आवेदन किया गया था। इसके बाद अपील कर्ता के हस्ताक्षर वाले शपथ-पत्र के साथ 11 अगस्त 2024 को अपील वापस लेने का अधिवक्ता अजय कुमार यादव की तरफ से आवेदन पेश किया गया था।
अपीलकर्ता शालिनी यादव ने सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया कि वह वकील अजय कुमार यादव को नहीं जानतीं और उनकी तरफ से उनके पक्ष में कभी कोई वकालतनामा निष्पादित नहीं किया गया है। अधिवक्ता एस.पी. मिश्रा की तरफ से बताया गया कि उनकी तरफ से भी कोई एनओसी नही दी गयी है।
अपील की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अधिवक्ता अजय कुमार यादव तथा शपथ आयुक्त ( ओथ कमिश्नर ) को दूसरे व तीसरे चरण की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से तलब किया। अधिवक्ता अजय कुमार यादव ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नही है। उनकी तरफ से कोई वकालतनामा दायर नहीं किया गया है और वह कोर्ट में उपस्थित अपीलकर्ता को नही पहचानते है।
शपथ आयुक्त ( ओथ कमिश्नर ) सुश्री लक्ष्मी देवी सिंह भी ने बताया कि रविवार 9 अगस्त 2026 को एक महिला इस शपथ-पत्र को तैयार करवाने के लिए आई थी। जिस महिला ने इस हलफनामे को बनवाने के लिए उनसे संपर्क किया था और जिनका नाम उनके रजिस्टर में सीरियल नंबर 1037 पर दर्ज है। अपीलकर्ता के रूप में उपस्थित महिला वह महिला नही थी। कोर्ट में उपस्थित अधिवक्ता अजय कुमार यादव वह व्यक्ति नही थे, जो महिला के साथ आये थे।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। ओथ कमिश्नर के रजिस्टर में कई जगह ओवर-राइटिंग है और बीत चुकी तारीखों के लिए कई खाली पन्ने हैं। रविवार 9 अगस्त 2026 के लिए चार खाली पन्ने हैं। एकलपीठ ने रजिस्टर जब्त करते हुए न्यायिक रजिस्ट्रार को चार सप्ताह में मामले की जांच करने के आदेश जारी किये है। एकलपीठ को अपने आदेश में कहा है कि ओथ कमिशनरके जब्त किये गये रजिस्टर को जांच में शामिल किया जाये। आपराधिक गतिविधि प्रतीक होती है तो पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाये। जिससे दोषियों को सजा मिल सके।
अनावेदक रेखा बैजल तथा नेहा शुक्ला की तरफ से अधिवक्ता बदलने के आवेदन पर सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि रेखा बैजल का 7 अगस्त 2024 को निधन हो गया है। एकलपीठ ने नेहा शुक्ला की तरफ से अधिवक्ता धर्मेन्द्र सोनी को अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किये जाने को मंजूरी प्रदान कर दी।
