इंदौर: शहर की कई गृह निर्माण संस्थाओं का ऑडिट रिपोर्ट नहीं होने पर अपर कलेक्टर ने जमकर संस्था पदाधिकारियों की लताड़ लगाई. साथ ही सहकारिता विभाग के उपायुक्त और सहायक आयुक्त को शोकाज नोटिस जारी कर दिया. खास बात यह है कि उक्त गृह निर्माण संस्था आईडीए द्वारा डी नोटिफाइड योजना 171 में शामिल है, जिसके 5 हजार से ज्यादा सदस्य प्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे है. अपर कलेक्टर ने संस्था पदाधिकारियों और सहकारिता विभाग को वरीयता सूची बनाने का आदेश दिया है.
कलेक्टर शिवम वर्मा ने आईडीए की योजना 171 में शामिल 13 संस्थाओं की वरीयता सूची और जांच का काम अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार को दिया है. यूकेजी 13 संस्थाओं के करीब 5 हजार से ज्यादा सदस्य पिछले 35 सालों से प्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे है. उक्त मामले का निराकरण करने के लिए अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार ने आज कलेक्टर कार्यालय में सहकारिता विभाग और संस्था पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी. बैठक में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार के सामने खुलासा हुआ किआदि गृह निर्माण संस्थाओं का कई सालों से ऑडिट ही नहीं हुआ है.
ऑडिट नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद अपर कलेक्टर सहकारिता विभाग और संस्थाओं के पदाधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई. उन्होंने संस्था पदाधिकारियों से पूछा कि संस्थाओं का ऑडिट क्यों नहीं कराया गया? इसका किसी के पास जवाब नहीं था. वहीं सहकारिता विभाग के अधिकारियों को भी कार्य में लापरवाही का कारक मानते कार्रवाई नहीं का दोषी माना है. बैठक में अपर कलेक्टर ने सभी 13 संस्थाओं को 7 दिन में ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के नोटिस जारी करने के निर्देश दिए. साथ ही सहकारिता उपायुक्त मनोज जायसवाल और सहायक आयुक्त जीएस परिहार को भी शोकाज नोटिस जारी किया गया.
वरियता सूची देने को कहा
अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार ने बताया कि आज आईडीए की योजना 171 से मुक्त हुई 13 संस्थाओं के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें कई संस्थाओं का 2003-04 ओर 2017-18 से ऑडिट ही नहीं किया गया था. उक्त विषय को लेकर संस्थाओं को 7 में ऑडिट रिपोर्ट और वरीयता सूची देने का कहा है. साथ ही सहकारिता विभाग के डीआरओर एआर को कार्य में लापरवाही करने के लिए शोकाज नोटिस दिया.
