नयी दिल्ली, 20 अगस्त (वार्ता) देश में मानसिक स्वास्थ्य को अस्पतालों, क्लिनिकों और केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित बातचीत से बाहर निकालकर आम लोगों के बीच ले जाने के उद्देश्य से आज नयी दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में “बियॉन्ड द होराइज़न – ए राइड फॉर रेज़िलिएंस” अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
करीब 55 दिनों की यह मोटरसाइकिल यात्रा दिल्ली से कन्याकुमारी और वापस दिल्ली तक की दूरी तय करेगी। यह यात्रा 50 से अधिक शहरों से गुज़रेगी और रास्ते में 100 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों तथा सामुदायिक स्थलों तक पहुंचेगी।
इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेत्री और सांस्कृतिक हस्ती शर्मिला टैगोर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। इस अभियान का नेतृत्व मानसिक स्वास्थ्य अधिवक्ता, मोटिवेशनल स्पीकर, फैशन स्टाइलिस्ट और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर सहर हाशमी कर रही हैं, जो अपनी रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल पर छह सदस्यीय सहयोगी दल के साथ यह यात्रा करेंगी।
इस समारोह को मुख्य अतिथि शर्मिला टैगोर ने संबोधित करते हुए कहा, “आज हम सब यहां एक बहुत खास वजह से इकट्ठा हुए हैं। यह 2000 किलोमीटर से ज्यादा की बहुत ही मुश्किल यात्रा है। यह यात्रा शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सकों, इलाज करने वालों व परिवार के साथ-साथ सेहत से जुड़े फैसलों में अपनी भूमिका को पहचानने, उसे संभालने और इस मुश्किल व जिम्मेदारी भरे काम को बेबाकी से दुनिया के सामने रखने की बात करती है। मानसिक स्वास्थ्य व अन्य बीमारियों से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने का असर बहुत गहरा होता है। जिन्होंने यह सब खुद झेला है, उनका ऐसा करना बहुत ही तारीफ के काबिल है। नारी सशक्तिकरण की बातें बहुत तेजी से बदल रही हैं। शायद यह पहली ऐसी मोटरसाइकिल यात्रा है, जो इतने बड़े पैमाने पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल कर रही है। मैं इस पहल को दिल से बधाई देती हूँ और उम्मीद करती हूं कि यह यात्रा सफल होगी और अपने लक्ष्यों को हासिल करेगी।”
बाइक राइडर सहर हाशमी ने इस अवसर पर अपनी व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य यात्रा के बारे में बातें साझा कीं। उन्होंने उन परिस्थितियों के बारे में बताया, जिन्होंने “बियॉन्ड द होराइज़न” को जन्म दिया। उन्होंने युवाओं, परिवारों और समुदायों तक सीधे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत पहुंचाने के महत्व पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम में एमएचआई की चीफ एडवाइजर डॉ. श्रुति चक्रवर्ती, पीएफआई की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा और मनोवैज्ञानिक खिली मरवाहा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन अमृता जोहरी ने किया। इसके अलावा एनी राजा, इकबाल अहमद और देव देसाई ने भी इस यात्रा के लिए शुभकामना संदेश साझा दिये।
“बियॉन्ड द होराइज़न” सुश्री सहर हाशमी की अपनी मानसिक स्वास्थ्य यात्रा से निकला अभियान है। गंभीर मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के बाद, उन्होंने मानसिक बीमारी से जुड़े शर्म, डर और चुप्पी को चुनौती देने के लिए अपने अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा करना शुरू किया। इससे पहले वह दिल्ली से कश्मीर तक मोटरसाइकिल यात्रा कर 20 शहरों में सार्वजनिक संवाद आयोजित कर चुकी हैं। वर्तमान अभियान दक्षिण भारत की तरफ उसी प्रयास का विस्तार है।
यात्रा के दौरान सुश्री सहर हाशमी और उनकी टीम छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामुदायिक समूहों और नागरिक समाज संगठनों के साथ संवादात्मक जागरूकता सत्र आयोजित करेगी। इन सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकट, भावनात्मक परेशानी, पढ़ाई और सामाजिक दबाव, शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना, पैनिक अटैक जैसी परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देना तथा पेशेवर मदद कब और कैसे ली जाए जैसे विषयों पर बातचीत की जायेगी।
इस अभियान को मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव (एमएचआई) और पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) का सहयोग प्राप्त है। एमएचआई अनुदान, क्षमता निर्माण और वकालत के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को अधिकारों के दृष्टिकोण से सुलभ बनाने का काम करती है, जबकि पीएफआई भारत में लैंगिक रूप से संवेदनशील जनसंख्या, स्वास्थ्य और विकास संबंधी रणनीतियों पर काम करने वाली राष्ट्रीय संस्था है।
सुश्री सहर हाशमी के साथ छह सदस्यीय सहयोगी दल यात्रा करेगा, जिसमें शमीरा अष्टफ (सामाजिक कार्यकर्ता), फरहत खान (शिक्षाविद), प्रीति प्रभा (स्वतंत्र पत्रकार व फिल्म निर्माता), सनी लोचव (फिल्म निर्माता), अमित यादव (समुदायिक कार्यकर्ता) और राकेश सैनी (पेशेवर ड्राइवर) शामिल हैं।
यात्रा के अलग-अलग चरणों में पूर्व नौकरशाह व लेखिका रेबेका त्रिवेदी (दिल्ली-मैंगलोर), वैधानिक एवं विकास परामर्शदाता सीना दबीर (मुम्बई-गोवा), पूर्व नौकरशाह व लेखिका रेबेका मैथ्यू (मदुरै-दिल्ली) और महिला अधिकार कार्यकर्ता मनीषा (हिम्मतनगर-नवसारी) भी शामिल होंगी। शबनम हाशमी इस अभियान की राष्ट्रीय समन्वयक हैं।
