नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने तीन दशक तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद गुजरात के एक भ्रष्टाचार मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस उज्ज्वल भुयान और अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने ग्राम पंचायत के एक रेवेन्यू अधिकारी (तलाटी-सह-मंत्री) और चपरासी को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल एक चपरासी के पास 20 रुपये का नोट मिलने से कर्मचारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने माना कि रिश्वत की मांग साबित करने की बुनियादी शर्त पूरी नहीं हुई थी, क्योंकि शिकायतकर्ता को उसका इनकम सर्टिफिकेट पहले ही सौंपा जा चुका था।
बर्खास्त हुए पुराने फैसले
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 1999 के फैसले और 2015 में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा बरकरार रखी गई सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस निर्णय से दोनों अपीलकर्ताओं को राहत मिली है और उनके जमानत बॉन्ड भी रद्द कर दिए गए हैं।

