अमानक स्पीड ब्रेकरों पर हाईकोर्ट ने किया केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने सडक़ पर बने अमानक स्पीड ब्रेकरों के मामले को सख्ती से लिया। दायर मामले में कहा गया है कि सडक़ पर रफ्तार नियंत्रित करने के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकर यदि नियमों के मुताबिक न हों तो वे खुद हादसे का कारण बन सकते हैं। मामले में प्रदेशभर में नियमों के विपरीत बनाए गए स्पीड ब्रेकरों को हटाने और भविष्य में निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को निर्धारित की है।

यह जनहित का मामला जबलपुर के गंगानगर निवासी अधिवक्ता कार्तिकेय लखेरा की की ओर से दायर किया गया है। जिसमें आरोप है कि प्रदेश में कई जगह निजी व्यक्तियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य संस्थाओं ने सक्षम अनुमति के बिना स्पीड ब्रेकर बना दिए हैं। इनका आकार, ऊंचाई और डिजाइन मनमाना होने का दावा किया गया है। जनहित याचिका में कहा गया है कि सडक़ सुरक्षा के लिए बनाए जाने वाले स्पीड ब्रेकर यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हों तो वे सुरक्षा उपकरण के बजाय जोखिम का कारण बन जाते हैं। याचिकाकर्ता ने सरकारी एजेंसियों द्वारा बनाए गए कई स्पीड ब्रेकरों के मानकों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

आरोप है कि कई स्थानों पर ऊंचाई, चौड़ाई, डिजाइन, मार्किंग और दृश्यता जैसे आवश्यक सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। इतना ही नहीं अत्यधिक ऊंचाई और गलत डिजाइन वाले स्पीड ब्रेकरों से वाहन चालकों को अचानक झटका लगता है। इससे दोपहिया और चार पहिया वाहनों को नुकसान पहुंचने के साथ लोगों को शारीरिक परेशानी भी हो रही है। गंभीर मामलों में रीढ़ की हड्डी से संबंधित चोटों की आशंका भी जताई गई है। याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश मोटर यान नियम 1994 के नियम 219 और इंडियन रोड्स कांग्रेस की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि स्पीड ब्रेकर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही बनाए जाने चाहिए। हाईकोर्ट से प्रदेशभर में अमानक स्पीड ब्रेकरों का सर्वे कराकर उन्हें हटाने और भविष्य में नियमों के मुताबिक ही निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

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