मुंबई, मुंबई महानगरपालिका की आम सभा की बैठक में बेस्ट के डिपो के आधुनिकीकरण और निजीकरण से जुड़े पीपीपी प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्षी दलों ने बेस्ट की जमीनों को सौंपने पर गंभीर आपत्ति जताई, जबकि सत्ताधारी गठबंधन ने इसे जरूरी कदम बताया।
विपक्ष का कड़ा विरोध और सवाल
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और मनसे के पार्षदों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि इससे मुंबई को कोई आर्थिक फायदा नहीं होगा। विपक्षी नेताओं ने मांग की कि इस कदम से शहर को होने वाले नफे-नुकसान पर स्पष्ट श्वेत पत्र जारी किया जाए।
सत्ता पक्ष और प्रशासन का रुख
प्रस्ताव का बचाव करते हुए शासक दल के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जमीन बेची नहीं बल्कि लीज पर दी जा रही है, जिससे मिलने वाली राशि से नई बसें खरीदी जाएंगी। बेस्ट प्रशासन ने बताया कि आधुनिक डिपो और बेहतर परिवहन सेवाओं के लिए यह पीपीपी मॉडल जरूरी है।

