सीहोर: जंगल बचाने और पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावों के बीच भेरूंदा तहसील के डाबरी गांव से सामने आया मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है. ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से भूमाफिया और जंगल माफिया ने मिलकर एक हजार से अधिक सागौन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी. यही नहीं, पेड़ों की कटाई के बाद करीब 50 एकड़ से अधिक जंगल भूमि को ट्रैक्टर चलाकर कृषि योग्य बनाने की कोशिश भी की जा रही है.
पेड़ों की इस कथित अवैध कटाई से आक्रोशित डाबरी गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण मंगलवार को बैनर, पोस्टर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी करते हुए जंगल काटने वालों की तत्काल गिरफ्तारी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. ग्रामीणों ने डिप्टी कलेक्टर गिरिराज परिहार को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की.
कलेक्ट्रेट शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने वन विकास निगम के क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई बिना स्थानीय स्तर पर जानकारी के संभव नहीं है. इसलिए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जाए.
शिकायती ज्ञापन देने वालों में सुनील मीणा, सोपानसिंह, श्रीकिशन, बाबूलाल जाट, लखनलाल, गौरीशंकर, रामलाल, अम्बाराम, तेजराम, ओम सिंह, मुकेश, ज्वारीलाल, पदम सिंह, नंदराम, मोहन सिंह, साहूलाल, सतीश, फूलसिंह, सुरेश, थान सिंह, प्रीतम, ललित राय, शेरसिंह, जसमत सिंह, परवेज, जमशेद, लक्ष्मीनारायण, मनोराम, साबिर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
एक पेड़ मां के नाम के बीच जंगल का कत्लेआम
ग्रामीणों ने कहा कि एक ओर सरकार ‘एक पेड़ मां के नामÓ जैसे अभियान चलाकर लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में खड़े बेशकीमती सागौन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि लगाए जा रहे पौधों की संख्या गिनने से ज्यादा जरूरी क्या मौजूदा जंगलों को बचाना नहीं है? ग्रामीणों ने वन कटाई पर तत्काल रोक लगाने, जंगल भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को हटाने तथा पेड़ काटने और जंगल भूमि को समतल करने वालों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही वन विकास निगम के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोष सिद्ध होने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई।
वन विकास निगम की चौकी के पास ही कटते रहे पेड़
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि कम्पार्टमेंट नंबर आर-259, आर-260 और आर-459 में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कथित अवैध कटाई की गई. उनका कहना है कि मौके पर हजारों पेड़ों को काटे जाने के साथ जंगल की जमीन को ट्रैक्टरों से समतल किया जा रहा है. सबसे गंभीर सवाल यह है कि यह सब कथित तौर पर वन विकास निगम की चौकी के आसपास हुआ, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई
