यातायात व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट नाराज

इंदौर। शहर में बिगड़ी यातायात व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट जस्टिस ने आज सुनवाई के दौरान यातायात विभाग को खुद का अनुभव साझा करते हुए कहा है कि स्थिति नहीं सुधरी तो प्रमुख सचिव गृह विभाग को बुलाना पड़ सकता है।

आज हाईकोर्ट में शहर के यातायात व्यवस्था को लेकर राजलक्ष्मी फाउंडेशन और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई हुई। यातायात सुधार को लेकर हाईकोर्ट में 12224/ 2019 से याचिकाएं दायर है। उक्त मामले में आज हाईकोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर एवं आलोक अवस्थी की बेंच ने सुनवाई की।

जस्टिस अभ्यंकर ने अतिरिक्त डीसीपी विक्रम सिंह को बताया कि यातायात सिग्नल पर रेड लाइट में भी वाहन चालक रुकते नहीं है। सिग्नल तोड़कर मोटर साइकिल चालक मेरी कार के पास आकर खड़ा हो गया, लेकिन यातायात पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया और शिरीन सिलावट ने यातायात व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठते हुए कहा कि प्रमुख चौराहों पर 20 से 26 सेकंड का टाइम है। चौराहों पर सिग्नल बंद पड़े है। सड़कों पर गड्ढे, जलभराव और यातायात विभाग सीसीटीवी कैमरा भी बंद है। इस कारण शहर में घंटों जाम लग रहा है।

हाईकोर्ट ने अतिरिक डीसीपी विक्रम सिंह रघुवंशी से यातायात स्टाफ की जानकारी मांगी। बताया गया कि 2013 में 850 लोगों का स्टाफ है, लेकिन वर्तमान उतना विभाग के पास स्टाफ नहीं है। स्टाफ की कमी है।

उक्त तर्को को सुनने के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट कहा कि यातायात बदहाली की यदि स्थिति नहीं सुधरी तो कोर्ट प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को बुलाना पड़ सकता है। शहर की जनता खराब यातायात व्यवस्था के चलते परेशानी भोग रही है। मामले में अगली सुनवाई पर आगे की चर्चा होगी।

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