होर्मुज़ में तनाव बढ़ने के बीच ओमान की मध्यस्थ वाली भूमिका अहम

वाशिंगटन, 18 अगस्त (वार्ता) अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री यातायात बहाल कराने के प्रयासों में ओमान अब भी अहम मध्यस्थ बना हुआ है। ऐसे समय में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओमान को दी गयी धमकियों ने पहले से ही नाजुक कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

अमेरिका के डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने ओमान को ईरान के साथ बातचीत में ‘महत्वपूर्ण वार्ताकार’ बताते हुए सवाल उठाया कि क्षेत्रीय कूटनीति में अहम भूमिका निभाने वाले देश को धमकी देना कितना उचित है। श्री केली ने सीएनएन से कहा, “ओमान हमारा सुरक्षा साझेदार रहा है और ईरानियों के साथ होने वाली किसी भी तरह की बातचीत में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।” उन्होंने कहा, “यही समस्या का एक हिस्सा है कि राष्ट्रपति बिना किसी रणनीति, रणनीतिक लक्ष्य, योजना या समयसीमा के इस स्थिति में उतर गए और अब फंस गए हैं तथा इससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं तलाश पा रहे हैं।”

श्री केली ने कहा कि ओमान के साथ तनाव बढ़ने से वाशिंगटन के लिए संघर्ष से कूटनीतिक रास्ते से बाहर निकलना और मुश्किल हो सकता है। उन्होंने आगाह किया कि लंबे समय तक जारी टकराव का आर्थिक असर युद्धक्षेत्र से बाहर भी महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर श्री ट्रंप ‘इससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं तलाशते’ तो पेट्रोल, डीजल, उर्वरक और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी। श्री केली की यह टिप्पणी श्री ट्रंप की उस धमकी के बाद आयी है जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अमेरिकी प्रयासों में ओमान के हस्तक्षेप की स्थिति में उसे ‘बम से उड़ाने’ की धमकी दी थी।

ओमान ने ताजा धमकी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। श्री ट्रंप ने मई में भी ओमान को धमकी देते हुए कहा था कि “ओमान भी बाकी सभी की तरह व्यवहार करेगा, वरना हमें उन्हें उड़ा देना होगा।”ताजा घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में ओमान की लंबे समय से चली आ रही भूमिका को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात को लेकर बातचीत के बीच ओमान की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गयी है। इस दौरान जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आयी है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से नये सिरे से नौवहन व्यवस्था को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत ‘पूरी गंभीरता’ से जारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में ‘प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे पक्षों’ के कारण देरी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान का मानना है कि बाहरी दबाव समझौते की कोशिशों को जटिल बना रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका-ईरान टकराव के बीच बुरी तरह प्रभावित रहा है। मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कम से कम तीन वाणिज्यिक जहाज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे। वहीं अमेरिका ने कहा है कि 17 अगस्त तक उसने 64 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया था।

ब्रिटेन की मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहे एक जहाज को ‘अज्ञात मिसाइल’ ने निशाना बनाया। इसके प्रभाव से जहाज के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य घायल हुआ। ओमानी तटरक्षक बल ने चालक दल के अन्य सदस्यों की मदद की।

इस घटना ने वाणिज्यिक जहाजों के लिए बढ़ते सुरक्षा जोखिम को रेखांकित किया और जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर दबाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों ने यह भी चेतावनी दी है कि ओमान के खिलाफ अमेरिकी धमकियां खाड़ी देशों के साथ वाशिंगटन के संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। खाड़ी देश इस बात से निराश हैं कि अमेरिका उन्हें सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं रहा है। ऐसे में ट्रंप की ओर से दी जा रही धमकियां क्षेत्र में अमेरिकी स्थिति को मजबूत करने में मददगार नहीं हैं।

इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए नए मार्गों को लेकर ईरान और ओमान के बीच समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से वाशिंगटन मुश्किल स्थिति में आ गया है। ऐसी व्यवस्था अन्य खाड़ी देशों को भी समुद्री नाकेबंदी जैसी स्थिति को समाप्त करने और सुरक्षित नौवहन बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

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