
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और करोड़ों रुपये के कथित फर्जी लेनदेन से जुड़े मामले में कटनी पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस रामकुमार चौबे की एकलपीठ ने करोड़ों रुपये के मनी ट्रेल के बावजूद संबंधित मुख्य लोगों से पूछताछ नहीं किए जाने पर हैरानी जताई। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 17 अप्रैल 2026 से जेल में बंद योगेश बजाज को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
दरअसल मामला कटनी कोतवाली में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। आरोप है कि कटनी कंप्यूटर्स के कर्मचारी ओमप्रकाश के पहचान संबंधी दस्तावेज और चेक लेकर कटनी काम्प नाम से फर्म और बैंक खाता खोला गया। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल आनलाइन गेमिंग से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किए जाने का आरोप है। पुलिस ने मामले में योगेश बजाज सहित अन्य लोगों को आरोपित बनाया था। कोर्ट के सामने पेश बैंक रिकॉर्ड में आनलाइन गेमिंग से जुड़े करीब 11.94 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला। यह रकम कटनी कंप्यूटर्स के मालिक विजय बहरवानी और उनके कर्मचारियों के बैंक खातों में पहुंची थी। इसके बावजूद जांच की दिशा को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने गौर किया कि करोड़ों रुपये का लेनदेन सामने आने के बावजूद चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस ने न तो कटनी कंप्यूटर्स के मालिक का बयान दर्ज किया और न उन कर्मचारियों से पूछताछ की, जिनके खातों में बड़ी रकम पहुंची थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच की गंभीर कमी माना। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि आनलाइन गेमिंग से जुड़ी रकम में से कोई राशि योगेश बजाज के बैंक खाते में गई थी। उपलब्ध जांच सामग्री को देखते हुए अदालत ने उनकी हिरासत और भूमिका पर विचार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
