
सिंगरौली । हर्रहवा स्थित सासन पावर प्लांट के ऐश डाइक-1 के क्षतिग्रस्त होने और करीब 5,760 टन फ्लाई ऐश के खेतों व आवासीय क्षेत्रों में फैलने के मामले में जिला प्रशासन ने कंपनी प्रबंधन पर शिकंजा कस दिया है। कलेक्टर गौरव बैनल ने मेसर्स सासन पावर लिमिटेड के महाप्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक जवाब मांगा है। नोटिस में सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लिया गया है।
म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अनुविभागीय दण्डाधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने माना है कि 14 अगस्त की मध्यरात्रि तेज बारिश के बाद ऐश डाइक के बाहरी हिस्से में भूस्खलन हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में राखड़ बहकर आसपास के खेतों और रहवासी क्षेत्रों तक पहुंच गई। रिपोर्ट में निर्धारित फ्रीबोर्ड तथा मानसून पूर्व सुरक्षा संबंधी निर्देशों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेकिन इस पूरे मामले में एक अहम सवाल अब ग्रामीणों की ओर से उठाया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हादसे से करीब तीन दिन पहले क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अमला एसडीएम के साथ ऐश डाइक का निरीक्षण करने पहुंचा था।
प्रदूषण अधिकारी पर ग्रामीणों का गंभीर आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि उस समय उनके समक्ष डैम को पूरी तरह सुरक्षित, निर्धारित मापदंडों के अनुरूप और खतरे से मुक्त बताया गया था। यदि ग्रामीणों का यह दावा सही है और निरीक्षण के बाद वास्तव में सुरक्षा संबंधी ऐसी रिपोर्ट दी गई थी, तो महज तीन दिन बाद डैम का क्षतिग्रस्त होकर राखड़ का खेतों में पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि कंपनी प्रबंधन से जवाब मांगने के साथ उस निरीक्षण में शामिल अधिकारियों से जवाब-तलब क्यों नहीं किया गया, यदि निरीक्षण में सब कुछ सुरक्षित पाया गया था, तो उसके तत्काल बाद ऐसी स्थिति कैसे निर्मित हुई, ग्रामीणों का आरोप है कि कहीं कंपनी के प्रभाव में आकर तो डैम को सुरक्षित नहीं बताया गया। हालांकि इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
फसलों की नुकसानी की भरपाई कंपनी से
नोटिस में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता तथा अन्य पर्यावरणीय कानूनों के तहत कार्रवाई और संचालन सम्मति निरस्त करने का प्रस्ताव भेजने की चेतावनी दी गई है। प्रभावित फसलों व संपत्तियों की क्षति का आकलन कर कंपनी से वसूली की बात भी कही गई है। अब ग्रामीणों की मांग है कि कंपनी के साथ निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो और दोष पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
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