
उज्जैन। खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक करीब 730 मीटर मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की जद में बड़ी संख्या में मकान और दुकानें आ रही हैं। नगर निगम की ओर से नपती और भवनों पर निशान लगाने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता बढ़ी है। नोटिस लेने के बाद रहवासी बोले की 15 फीट की बजाय 12 फिट रहने दो।
इस क्षेत्र की खास बात यह है कि यहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का निवास भी है और चौड़ीकरण की जद में मुख्यमंत्री का मकान भी बताया जा रहा है। नगर निगम सभापति कलावती यादव तथा भाजपा नगर उपाध्यक्ष जगदीश पांचाल के मकान भी प्रभावित होने की बात क्षेत्र में सामने आ रही है। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में ही विकास के लिए निजी संपत्तियों पर चौड़ीकरण की यह प्रक्रिया लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
रहवासियों का कहना है कि वे सिंहस्थ की तैयारियों और उज्जैन के विकास में सहयोग करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। शहर के दूसरे हिस्सों में भी लोगों ने अपने मकान-दुकान का हिस्सा स्वयं हटाकर चौड़ीकरण में सहयोग किया है। अब्दालपुरा के लोग भी भारी मन से अपने आशियाने हटाने को तैयार हैं, उनका यह भी कहना है कि नुकसान कम से कम हो, इसका रास्ता निकाला जाना चाहिए।
क्षेत्र की महिलाओं और पुरुषों ने एकत्र होकर नगर निगम सभापति कलावती यादव के सामने अपनी परेशानी रखी। रहवासियों की मांग है कि प्रस्तावित 15 मीटर चौड़ी सडक़ को यदि 12 मीटर किया जा सके तो कई परिवारों का नुकसान कम हो सकता है। उनका तर्क है कि सिंहस्थ के लिए मार्ग जरूरी है, लेकिन चौड़ीकरण की सीमा में थोड़ी कमी से कई घर पूरी तरह टूटने से बच सकते हैं।
पहले 18 मीटर का प्रावधान बुजुर्ग और अकेली महिलाओं को दिक्कत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ी बहन और निगम सभापति कलावती यादव ने रहवासियों को बताया कि पहले मार्ग के लिए 18 मीटर का प्रावधान था, जिसे घटाकर 15 मीटर किया गया है। उनका कहना है कि 15 मीटर की सीमा में भी प्रभावित परिवारों का नुकसान कम करने का प्रयास किया गया है। दूसरी ओर, नगर निगम की टीम बुधवार को भी प्रभावित भवनों पर नोटिस देने की प्रक्रिया में जुटी रही। सबसे अधिक चिंता उन परिवारों को है जिनके पूरे मकान चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। कुछ घरों में बुजुर्ग और विधवा महिलाएं हैं, जबकि कई परिवारों के लिए वही मकान उनकी पूरी जमा-पूंजी है। ऐसे परिवारों का कहना है कि यदि मकान पूरी तरह हटाना पड़े तो उचित मुआवजा या राहत का प्रावधान होना चाहिए, ताकि वे दोबारा अपना आशियाना खड़ा कर सकें।
