
श्री गांधी ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड के छात्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं।
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के माध्यम से छात्रों से संवाद शुरू किया है और कई मांगों पर सहमति भी बनी है। इसके बावजूद आंदोलन जारी है और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ”मैं सुझाव देना चाहता हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करें। इससे उनकी शेष चिंताओं के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।” उन्होंने कहा कि भारत के युवा देश का भविष्य हैं और ऐसे संकट के समय उनके साथ एकजुटता और समर्थन खड़ा करना हमारी जिम्मेदारी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और इस मुद्दे के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। श्री गांधी ने पत्र में कहा है कि कांग्रेस संविधान में निहित शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लोकतंत्र का एक केंद्रीय स्तंभ मानती है और पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक तथा शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का पूरा समर्थन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को आरएसएस और भाजपा ने अपने कब्जे में लेकर छात्रों के शोषण और दमन का माध्यम बना दिया है तथा यह एक दशक पहले जैसी मजबूत ज्ञान-व्यवस्था नहीं रह गई है।
