
जबलपुर। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसलिंग की तरफ से सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाये गये नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को सूटेबल कॉलेज में स्थानांरित किये गये छात्रों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सूटेबल कॉलेज में स्थानांतरित किये गये छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल किये जाने तथा उनका रिजल्ट जारी करने के निर्देश जारी किये। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की है।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अधिवक्ता विशाल बघेल ने प्रदेश में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि नर्सिंग कॉलेजों के मान्यता देने में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच में प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों में 156 कॉलेज सूटेबल पाये गये थे। हाईकोर्ट ने जांच में अनसूटेबल कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेज में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये थे। सीबीआई जांच में पाई गई कमियों को दूर कर 89 कॉलेजों भी सूटेबल की श्रेणी में आ गये थे।
मध्य प्रदेश नर्सिंग कौंसिल की तरफ से पूर्व में दायर आवेदन की सुनवाई करते हुए नर्सिंग कॉलेजों के लंबित परीक्षाएं कराने और परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति की मांग करते हुए आवेदन पेश किया था। युगलपीठ ने सीबीआई जांच में सूटेबल पाये गये नर्सिंग कॉलेज की जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करवाने की अनुमति मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को प्रदान की है। इसके अलावा युगलपीठ ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने की भी अनुमति प्रदान करते हुए सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाये गये कॉलेजों की परीक्षा के आयोजन पर रोक बरकरार रखी थी।
मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसलिंग की तरफ से पैरवी के लिए उपस्थित हुए महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने युगलपीठ को बताया कि अनसूटेबल कॉलेजो से सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर हेतु पात्र पाये गए कुल पंजीकृत छात्र 4,475 हैं। जिनमे से शिफ्टिंग हेतु पंजीकृत छात्रों की संख्या 2,813 एवं चॉइस फिलिंग करने वाले छात्र 2,619 है। जिनमे से 2,395 छात्र सूटेबल काूलेज में स्थानांतरित किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने उक्त जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए इन सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल करने तथा रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं ।
ग्वालियर चंबल संभाग के कॉलेजों को झटका
हाईकोर्ट में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों ने आवेदन पेश कर बताया कि उनके कॉलेजों की जांच पूर्व में 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति द्वारा की जा चुकी है। जिसमें उन्हें उपयुक्त पाया गया था इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन कॉलेजों की सीबीआई जांच पर अस्थाई रूप से रोक लगाई थी। कॉलेजों के छात्रों द्वारा हाईकोर्ट से मांग की गई कि उनके कॉलेजों की जांच पर वर्तमान में रोक होने के कारण उनके सूटेबल कॉलेज मान्य किए जाकर पूर्व वर्ष की भांति इस वर्ष भी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए तथा उनके परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं । याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कमेटी द्वारा ग्वालियर चंबल के इन कॉलेजों में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं की गई थी। जबकि ग्वालियर चंबल संभाग के कॉलेजों के द्वारा उक्त सत्रों में अनेकों फर्जी एवं डुप्लीकेट फैकल्टी दर्शाते हुए मान्यता प्राप्त की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान उक्त तथ्य को हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया था। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद उन कॉलेजों के संबंध में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की ।
