9 मौतों के बाद धांसड़ में चिताएं, पड़ाना में रोष

ब्यावरा/पड़ाना। सोमवार सुबह तेज बारिश के बीच पड़ाना में देवास जिले के सतवास गांव के रहने वाले 9 लोगों की कार डूबने से मौत हो गई थी. रैलिंग विहीन नाले से कार गिरी और हादसा हुआ. इस हादसे के बाद जहां सतवास गमगीन है वहीं पड़ाना में रोष व्याप्त है. सतवास गांव में 9 लोगों की एक साथ चिता उठी वहीं पड़ाना में लोगों में हादसे के बाद रोष और चिंता का माहौल है. पड़ाना वासियों ने गांव में मामूली से लापरवाही के कारण पूरे एक परिवार के कालकवलित होने पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए लापरवाहों पर कार्यवाही की मांग की है.

कल ग्राम पड़ाना के अंदर जो दुखद घटना हुई जिसमें लोग निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और रोड निर्माण एजेंसी के घटिया कार्य के कारण नौ लोगों की जान चली गई वहीं पहली बारिश में रोड निर्माण की पोल खुल गई जिसमें से नरसिंह मंदिर आश्रम में पानी मंदिर तक घुस गया गौशाला के पास वाली कॉलोनी के मकान में भी पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ आसरेठा रोड पर कई मकानों में और दुकानों में पानी घुस गया जिससे लाखों रुपए के समान का नुकसान हुआ. इस संबंध में आज पड़ाना के प्रतिनिधिमंडल के द्वारा आज एसडीम सारंगपुर को ज्ञापन देकर लोगों के हुए नुकसान की भरपाई एवं पानी निकासी की व्यवस्था सही करवाने बायपास रोड पर स्टेट लाइट सांकेतिक बोर्ड एवं अंधे मोड़ पर पाइप की रेलिंग लगवाने गौशाला के पास के नाले की व्यवस्थित पानी की निकासी लिए एवं जो निर्माणाधीन पुलिया है उनमें सुधार एवं संपूर्ण सडक़ मार्ग की उच्च स्तरीय जांच करवाने एम जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई करने हेतु अपनी मांग रखी. एसडीम ने तुरंत कार्रवाई करने का एवं जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई कभी विश्वास दिलाया. वही एसडीम द्वारा कल जिस प्रकार सभी ग्राम वासियों ने शासन प्रशासन का सहयोग किया उसके लिए भी सभी ग्राम वासियों का आभार भी व्यक्त किया.

पड़ाना में हुए हादसे में मृत बच्चों सहित 9 लोगों का देवास जिले के ग्राम धांसड़ में किया गया अंतिम संस्कार. एक साथ उठी अर्थियों तो पूरा गांव रो पड़ा. मंगलवार को गांव की गलियों से 9 अर्थियों को देखकर दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया. मृतकों में चार बच्चे में भी शामिल है. इसमें से मृतक शंकर, सागर बाई, विशाल, उसकी पत्नी पूजा, विशाल की बेटी वंशिका, महक का अंतिम संस्कार ग्राम धांसड़ में एक ही चिता पर किया गया. वहीं शंकर की बेटी रीनू बाई, उसके बेटे राजवीर और बेटी जसप्रीत का अंतिम संस्कार खंडवा जिले के पुनासा में किया हुआ. एक ही परिवार के 9 सदस्यों अर्थियों को उठता देख ग्रामीणों की आंखें नम हो गई.

सोमवार देर रात सतवास पहुंचे थे शव

मृतकों के शव सोमवार देर रात सतवास पहुंचे जहां शवों को शासकीय अस्पताल में रखा गया. हादसे के बाद शवों के आने में देरी को देखते हुए उन्हें रात में सतवास अस्पताल की मर्चुरी में रखने की व्यवस्था की गई. सतवास तहसीलदार संजय गर्ग ने बताया कि शव आने में देरी के कारण अस्पताल में रात के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए. रात करीब 10.45 पर शव अस्पताल लाए गए.

परिवार में एक बेटा बचा, जमीन तक रख दी थी गिरवी

धांसड़ गांव के लोगों ने बताया कि उनके पूरे परिवार के लोग गाड़ी में सवार थे. एक बेटा कुशाल इंदौर में रहता है. अब परिवार में वही बचा है. उसे काफी देर बात इस घटना की पता चल पाया. बताया जाता है कि पूरा परिवार सामान्य है, मजदूरी करते हैं. साथ ही पहले बीमारी में शंकर की पत्नी से को काफी राशि लगा चुके थे और आर्थिक रूप से काफी परेशान हो चुके थे. उन्होंने सागरबाई के उपचार केलिए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी.

लकवाग्रस्त मां को लेकर जा रहे थे, रास्ते में हो गया हादसा

धांसड़ गांव की निवासी सागर बाई के लकवे का उपचार करवाने के लिए पूरा परिवार देव स्थान जा रहा था. उनके गांव के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश पटेल ने बताया कि बेहद सामान्य परिवार से वे लोग थे. कुछ समय पहले सागरबाई का एक्सीडेंट हो गया था, इसके बाद वे लकवाग्रस्त हो गई थीं, कोमा में चली गई थीं. सारंगपुर के पास स्थित उक्त देव स्थान पर जाने से उन्हें आराम मिल रहा था. इसी के चलते पूरे परिवार के लोग इको कार में सवार होकर वहां जा रहे थे.

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