हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से ऐतिहासिक बनी ‘माँ शबरी के राम’ कावड़ यात्रा

मांडू। सकल हिंदू समाज द्वारा प्रतिवर्ष पवित्र श्रावण माह में निकाली जाने वाली माँ शबरी के राम कावड़ यात्रा इस वर्ष भी श्रावण माह के दूसरे सोमवार 10 अगस्त को श्रद्धा,आस्था,सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के उत्साहपूर्ण वातावरण में निकाली गई।नालछा क्षेत्र के संत शिरोमणि श्री रविदासजी महाराज की तपोस्थली काकड़ा खो से प्रारंभ हुई यह यात्रा ग्राम पन्नाला,नालछा,लुन्हेरा,भील कुंडा,बकान खेड़ा एवं बंजारीपूरा होते हुए बेड़वापूरा पहुंची जहां ऊंची पहाड़ी पर विराजित असेरिया महादेव मंदिर में कावड़ यात्रियों द्वारा पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया तत्पश्चात यात्रा का विधिवत समापन हुआ। नालछा खंड के अंतर्गत आने वाले 158 गांवों में से लगभग 140 गांवों के वरिष्ठ, युवाओं और मातृशक्ति सहित हजारों श्रद्धालुओं ने यात्रा में सहभागिता की यात्रा के दौरान नालछा में धर्म सभा का आयोजन किया गया जिसमे चतुर्भुज श्री राम मंदिर,मांडव के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. नरसिंह दासजी महाराज,नालछा के प्रसिद्ध श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में तपस्यारत 1008 श्री राजेंद्रपुरी जी महाराज,श्री शनि मंदिर नालछा में तपस्यारत संत श्री बालमुकुंद पुरी जी महाराज,खानन बुजुर्ग मंदिर में तपस्यारत संत श्री लिमसिंह जी महाराज,धार विभाग कार्यवाह श्री अरविंद चौधरी एवं नालछा खंड के माननीय खंड संघचालक श्री सुरेश निनामा मंचासीन रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर डॉ.नरसिंह दासजी महाराज ने कावड़ यात्रा की परंपरा एवं उसके धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कावड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा,तप,संयम और समर्पण की यात्रा है जिसमें श्रद्धालु पवित्र जल लेकर शिवालय पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी आस्था अर्पित करते हैं। उन्होंने माँ शबरी और प्रभु श्रीराम के पावन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि वनवासी जीवन व्यतीत कर रहीं माँ शबरी ने वर्षों तक प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा की। प्रभु श्रीराम जब उनकी कुटिया में पहुंचे तो माँ शबरी ने अत्यंत प्रेम और भक्ति से उनका स्वागत किया। यह प्रसंग बताता है कि सनातन परंपरा में भक्ति के सामने जाति,वर्ग और सामाजिक भेद का कोई स्थान नहीं है। माँ शबरी की निष्कपट भक्ति और श्रीराम का प्रेम समरसता,श्रद्धा और आत्मीयता का शाश्वत संदेश देता है। वही धर्मसभा के मुख्य वक्ता धार विभाग कार्यवाह अरविंद चौधरी ने बड़ी संख्या में उपस्थित सनातनी बंधुओं एवं मातृशक्ति को प्रणाम करते हुए कहा कि कुछ लोग भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं,जबकि चुनाव के समय यही लोग वोट की राजनीति के लिए मंदिरों में भगवान के सामने नतमस्तक होते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वार्थी लोगों को उनके कर्मों का फल भगवान अवश्य देंगे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अभिन्न अंग आदिवासी समाज को खंडित करने का प्रयास करने वाली ताकतों का जवाब समाज को अपनी एकजुटता और सामाजिक समरसता के माध्यम से देना होगा।साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सनातन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है तथा समाज को किसी भी प्रकार के भ्रम और विभाजन से बचाते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। श्री चौधरी ने अपने संबोधन में क्षेत्र में धर्मांतरण के प्रयासों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ईसाई मिशनरी गतिविधियों के माध्यम से सनातन धर्म को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने समाज से ऐसे प्रयासों के प्रति विशेष रूप से जागरूक एवं सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को अपने धर्म,संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के धर्मांतरण के प्रयासों के मुंह तोड़ जवाब देने के लिए सदैव तैयार रहने का आव्हान किया।

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