शिमला, 10 अगस्त (वार्ता) हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एक निजी कंपनी गवार शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को एक महिला को 2.23 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है।
चाम्याना में चार-लेन वाले शिमला बाईपास परियोजना के निर्माण के दौरान इस महिला का घर गिर गया था। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंड पीठ ने चंदा देवी की ओर से भेजे गए एक पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और यह निर्देश जारी किया। चंदा देवी का साढ़े तीन मंज़िला घर रंजना देवी की उस इमारत के बगल में था जो गिर गई थी, जिससे चंदा देवी का घर भी प्रभावित हुआ था।
न्यायालय ने एनएचएआई और परियोजना के काम से जुड़ी कंपनी को निर्देश दिया कि वे तय किए गए कुल मुआवज़े की राशि का 50-50 प्रतिशत हिस्सा चार हफ़्ते के भीतर जमा करें। न्यायालय के सामने पेश किए गए आकलन के अनुसार, रंजना देवी के गिरे हुए घर की कीमत 1,65,17,336 रुपये और उनके सामान की कीमत 58,38,588 रुपये आंकी गयी थी। इस तरह कुल मुआवज़ा राशि 2,23,55,924 रुपये तय की गयी।
न्यायलय ने पाया कि आकलन पिछले साल जुलाई में ही पूरा हो गया था, लेकिन एनएचएआई या कंपनी की ओर से रंजना देवी को कोई राशि नहीं दी गयी थी।
पीठ ने कहा कि एनएचएआई चार-लेन वाले परियोजना की ज़िम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। साथ ही, यह सवाल भी उठाया कि क्या पहाड़ी काटने और निर्माण का काम सही तरीके से और उचित देखरेख में किया गया था। न्यायालय ने उस घटना की गंभीरता पर भी ध्यान दिया, जिसमें चार-लेन वाले हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माण कार्य के दौरान एक चार मंज़िला इमारत कुछ ही सेकंड में ढहकर गायब हो गई।
यह परियोजना एनएचएआई के ज़रिए एनएच-5 को जोड़ने वाले शिमला बाईपास पर ‘पैकेज-II’ के तहत बनाया जा रहा है और गवार शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड साइट पर निर्माण कार्य कर रही है।
न्यायालय ने राज्य सरकार को चंदा देवी के घर की कीमत का आकलन करने का भी निर्देश दिया, जो बगल की इमारत के ढहने के बाद असुरक्षित हो गया है। यह आकलन उस समिति द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाना है जिसे राज्य सरकार ने आठ जून, 2022 को ‘राइट ऑफ़ वे’ (सड़क के लिए निर्धारित ज़मीन) के बाहर निजी ज़मीन और इमारतों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अधिसूचित किया था।
खंड पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों प्रतिवादी एनएचएआई और एम/एस गवार शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड तय मुआवज़े का 50-50 प्रतिशत हिस्सा वहन करेंगे और आदेश की तारीख से चार हफ़्ते के भीतर रंजना देवी को भुगतान करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
