इंदौर: बारिश का मौसम शुरू होने के बाद भले ही शहर में गर्मियों जैसा गंभीर जल संकट कुछ कम हुआ हो, लेकिन दूषित पानी की समस्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाइपलाइनों में सीवेज मिलने और पुरानी व्यवस्था के कारण कई इलाकों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य का खतरा बना हुआ है.ऐसी ही समस्या पिपल्याहाना क्षेत्र के चौहान नगर में सामने आई है. यहां नलों से आ रहा दूषित पानी लोगों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है. वार्ड क्रमांक 50 अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में नर्मदा लाइन से लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी घरों तक पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है.
क्षेत्र की सबसे आखरी गली के रहवासियों ने बताया कि गर्मी के दिनों में जहां रहवासियों को जल संकट का सामना करना पड़ा, वहीं अब बारिश के मौसम में दूषित पानी ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. रहवासियों को पानी का इस्तेमाल करने से पहले उसकी जांच और सावधानी बरतनी पड़ रही है, वहीं पीने और घरेलू जरूरतों के लिए कई लोगों को आसपास के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है. क्षेत्र में कुछ स्थानों पर सरकारी बोरवेल और बड़ी पानी की टंकी की व्यवस्था भी है, जिससे जरूरत के समय रहवासियों को थोड़ी राहत मिल जाती है. बावजूद इसके नर्मदा लाइन से साफ पानी की नियमित आपूर्ति नहीं होने से समस्या बरकरार है. पेयजल और ड्रेनेज लाइनों के आपस में मिलने से नलों में दूषित पानी पहुंच रहा है. गंदा पानी पीने से उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां फैल रही हैं. प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा सुधार और निगरानी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों का नल के पानी पर से भरोसा डिग गया है. रहवासियों का कहना है कि जिम्मेदारों को स्थायी समाधान के लिए गंभीरता से कदम उठाना चाहिए.
यह बोले रहवासी…
गर्मियों के दिनों में भी दूषित पानी आ रहा था और अब बरसात में भी गंदा पानी मिल रहा है. ऐसे में क्षेत्र के बोरिंग से पानी लेना पड़ता है.
– मंजू बाई
नलों से कभी कम तो कभी ज्यादा गंदा पानी आता है. कभी तो नर्मदा पानी के नल आते ही नहीं हैं. क्षेत्र की नर्मदा लाइन चेक हो जाए तो सबको सुविधा मिल सकती है.
– कविता अंकित
झोन से कर्मचारी आते हैं और लिखकर ले जाते हैं, लेकिन गंदे पानी की समस्या का निराकरण नहीं होता है. बीमारी से बचने के लिए हमें पानी को उबालकर पीना पड़ता है.
– उषा जायसवाल
