कचरे के ढेर से बनी ग्वालियर की नई पहचान, ‘वेस्ट टू वंडर’ सफारी बनी आकर्षण का केंद्र

ग्वालियर, कभी मलबे, कबाड़ और उजाड़ जमीन के रूप में पहचान रखने वाली ग्वालियर किले की तलहटी आज शहर के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में शामिल हो गई है। नगर निगम के अभिनव प्रयास “ग्वालियर सफारी – वेस्ट टू वंडर” ने न केवल बेकार पड़े स्क्रैप लोहे को नई जिंदगी दी है, बल्कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, पुनर्चक्रण (री-साइक्लिंग) और शहरी सौंदर्यीकरण का सफल उदाहरण बनकर उभरी है।

करीब ढाई एकड़ क्षेत्र में विकसित इस अनूठी सफारी में नगर निगम के कबाड़खाने में वर्षों से पड़े 150 टन से अधिक स्क्रैप लोहे से 14 विशाल वन्यजीवों की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। दहाड़ते शेर, जबड़ा फैलाए डायनासोर, मगरमच्छ, हाथी, जिराफ, गैंडा, ऊंट, भालू, चिंपांजी, कछुआ, पेंगुइन और मोर सहित कई वन्यजीवों की कलाकृतियां इतनी वास्तविक दिखाई देती हैं कि पहली नजर में उनके कबाड़ से बने होने का विश्वास करना मुश्किल होता है।

उजाड़ जमीन से बना हरियाली का संसार

जिस स्थान पर कभी अव्यवस्थित झोपड़ियां, मलबा और बंजर जमीन थी, वहां अब घुमावदार पथ, आकर्षक लैंडस्केप, शाम होते ही जगमगाती रोशनी और हरियाली पर्यटकों का स्वागत करती है। परिसर में 600 से अधिक स्थानीय प्रजातियों के पेड़ और लगभग 3,000 झाड़ियां एवं पौधे लगाए गए हैं। दीवारों पर फैली बोगनवेलिया और प्राकृतिक वातावरण सफारी को वास्तविक जंगल जैसा अनुभव प्रदान करते हैं।

पर्यटन के साथ पर्यावरण का संदेश

यह सफारी केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण का जीवंत संदेश भी देती है। यहां आने वाले बच्चों और युवाओं को यह समझने का अवसर मिलता है कि बेकार समझी जाने वाली सामग्री का भी रचनात्मक उपयोग किया जा सकता है।

निगम की आय का नया स्रोत

“वेस्ट टू वंडर” परियोजना नगर निगम के लिए आय का माध्यम भी बन गई है। अब तक प्रवेश टिकटों से करीब 10 लाख रुपये की आय हो चुकी है। प्रतिदिन औसतन 150 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जबकि सप्ताहांत में यह संख्या 500 से अधिक हो जाती है। अब तक 8 हजार से ज्यादा स्कूली विद्यार्थी यहां भ्रमण कर पर्यावरण और पुनर्चक्रण की जानकारी प्राप्त कर चुके हैं।

आगे और बढ़ेंगी सुविधाएं

पर्यटकों की सुविधा के लिए परिसर में कैंटीन विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। निगम का मानना है कि नई सुविधाएं जुड़ने से पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी तथा आय में भी वृद्धि होगी।

शहरों के लिए बना प्रेरक मॉडल

ग्वालियर की “वेस्ट टू वंडर” सफारी यह साबित करती है कि दूरदृष्टि और नवाचार के माध्यम से कचरे को भी आकर्षण में बदला जा सकता है। यह परियोजना टिकाऊ शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक भागीदारी का ऐसा मॉडल बनकर सामने आई है, जिससे देश के अन्य शहर भी प्रेरणा ले सकते हैं।

Next Post

लेबनान-इजरायल के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का सातवां दौर शुरू

Tue Aug 4 , 2026
रोम, 04 अगस्त (वार्ता) लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में प्रत्यक्ष वार्ता का सातवां दौर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम में शुरू हुआ। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल जून में लेबनान और इजरायल के बीच हुए अमेरिकी मध्यस्थता वाले […]

You May Like