20 साल से अधिक सेवा वाले रेल कर्मचारियों को तबादले में मिलेगी प्राथमिकता, रेलवे बोर्ड ने जारी की नई नीति

पंचकूला, 02 अगस्त (वार्ता) रेल मंत्रालय ने नई स्थानांतरण नीति लागू की है जिसमें लंबे समय से अपने अनुरोध पर स्थानांतरण का इंतजार कर रहे गैर-राजपत्रित रेल कर्मचारियों को राहत प्रदान की गई है। रेलवे बोर्ड ने 22 जुलाई, 2026 को जारी आरबीई संख्या 61/2026 के तहत निर्णय लिया है कि 20 वर्ष से अधिक नियमित सेवा पूरी कर चुके गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को अपने अनुरोध पर होने वाले तबादलों में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि 20 वर्ष से कम सेवा वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा स्थानांतरण व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।

रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन श्रेणीवार पंजीकृत किए जाते हैं और आवेदन की तिथि के आधार पर प्राथमिकता तय होती है। आवेदन स्वीकार करने वाली इकाई से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिलने के बाद स्थानांतरण आदेश जारी किए जाते हैं।

इस प्रक्रिया के कारण भारतीय रेल में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं, जो वर्षों से अपने अनुरोध पर तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि वे दो दशक से अधिक सेवा दे चुके हैं। इसी के मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने 20 वर्ष से अधिक नियमित सेवा वाले कर्मचारियों के लिए अलग प्राथमिकता श्रेणी बनाने का निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी पहले की तरह एचआरएमएस पोर्टल पर अपनी पसंद के रेलवे, मंडल या इकाई में स्थानांतरण के लिए आवेदन करेंगे। इसके बाद प्रत्येक माह की पहली तारीख को एचआरएमएस 20 वर्ष से अधिक नियमित सेवा वाले कर्मचारियों की समेकित प्राथमिकता सूची स्वतः तैयार करेगा।

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक स्वीकार करने वाली इकाई के लिए अलग-अलग श्रेणीवार प्राथमिकता सूची बनाई जाएगी। सूची में कर्मचारियों का क्रम नियमित सेवा के वर्षों के आधार पर अवरोही क्रम में होगा, अर्थात जिस कर्मचारी की नियमित सेवा अधिक होगी, उसे पहले स्थान पर रखा जाएगा। उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार इसी सूची के क्रम में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।

नई नीति के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया गया है कि एचआरएमएस पर ऑटो-ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद स्वीकार करने वाली इकाई स्वतः निर्धारित हो जाएगी और उसके लिए अलग से एनओसी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

ऑटो-ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को 15 दिनों के भीतर, वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार नियंत्रक जेएजी अधिकारी/शाखा अधिकारी की स्वीकृति के बाद कार्यमुक्त किया जाएगा।

हालांकि रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की कार्यमुक्ति केवल मंडल रेल प्रबंधक की स्वीकृति से ही रोकी जा सकेगी और वह भी सीमित परिस्थितियों में। इनमें कर्मचारी का विभागीय कार्रवाई या सतर्कता मामलों से मुक्त न होना, स्टॉक अथवा अभिलेखों का विधिवत हस्तांतरण पूरा न होना अथवा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता का अभाव शामिल है।

बोर्ड ने यह भी कहा है कि यदि स्टॉक या अभिलेखों का हस्तांतरण लंबित है तो संबंधित नियंत्रक अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह किसी अन्य कर्मचारी को नामित कर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराए। केवल इस कारण से कर्मचारी की कार्यमुक्ति एक माह से अधिक समय तक सामान्यतः नहीं रोकी जाएगी।

इसके अलावा जिन मामलों में कार्यमुक्ति रोकी जाएगी, उनकी प्रत्येक माह डीआरएम स्तर पर समीक्षा की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी के पास संबंधित पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं होगी तो एचआरएमएस पर जारी उसका स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 20 वर्ष वाली यह नई व्यवस्था केवल कार्यस्थल बदलने के लिए लागू होगी। इसके तहत श्रेणी बदलने या विभाग बदलने के अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसी प्रकार ओपन लाइन से प्रोडक्शन यूनिट या वर्कशॉप में स्थानांतरण भी इस योजना के दायरे में नहीं आएगा।

आदेश में कहा गया है कि 20 वर्ष से कम नियमित सेवा वाले कर्मचारियों पर वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया ही लागू रहेगी। उनके मामलों में आवेदन का पंजीकरण, आवेदन की तिथि के आधार पर प्राथमिकता तथा स्वीकार करने वाली इकाई से एनओसी लेने की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।

नई नीति को लागू करने से पहले रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे इकाइयों को निर्देश दिया है कि एचआरएमएस में कर्मचारियों की तैनाती, शैक्षणिक योग्यता तथा अन्य आवश्यक सेवा संबंधी विवरण पूरी तरह अद्यतन किए जाएं। बोर्ड के अनुसार यह योजना आदेश जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर एचआरएमएस की तैयारी पूरी होने के बाद लागू कर दी जाएगी।

 

 

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