युवा दे रहे वैश्विक उत्थान को गति, एआई के विस्तार, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अहम योगदान: मोदी

मैसूरु, 01 अगस्त (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वैश्विक तकनीक और नवाचार का पावरहाउस बनाने का श्रेय युवाओं को देते हुए कहा है कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का तेज़ी से विस्तार, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे इन्हीं का योगदान है।

मैसूरु के रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर (विवेक स्मारक) का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश का बदलाव युवाओं की आकांक्षाओं, हुनर और उद्यमशीलता से हो रहा है। उन्होंने कहा, “देश युवाओं की ताकत की वजह से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र बना है। युवाओं की ताकत से ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन गया है। भारत में बने डिजिटल समाधान कई देशों को प्रेरित कर रहे हैं। युवाओं की काबिलियत की वजह से ही भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण और एआई के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि युवा उद्यमी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं, मुद्रा योजना के ज़रिए व्यापार शुरू कर रहे हैं और स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों का नेतृत्व कर रहे हैं, जिससे वे देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में शुरू किया गया विवेक स्मारक देश सेवा के लिए समर्पित युवाओं को तैयार करने का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है जिसके लिए समाज और देश का हित सबसे ऊपर हो, जिसके लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ ही सबसे बड़ा मंत्र हो और भारत माता की सेवा ही जीवन का परम लक्ष्य हो।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी देश के युवा उसकी सबसे बड़ी ताकत तभी बन सकते हैं जब उन्हें सही मौके, सही दिशा और अपनी ही ज़मीन पर सपने देखने और सफल होने का भरोसा मिले।

शिक्षा में सुधारों का ज़िक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश में पिछले 12 सालों में 650 से ज़्यादा नए विश्वविद्यालय स्थापित किए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्था (आईआईटी) और भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का नेटवर्क बढ़ाया है। एमबीबीएस सीटों की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी की है और 21वीं सदी की ज़रूरतों के हिसाब से शिक्षा को ढालने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। उन्होंने कहा कि देश भर में 14,000 से ज़्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं, जबकि 10,000 से ज़्यादा अटल टिंकरिंग लैब छात्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में शिक्षा और लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने से भी अवसरों को ज़्यादा समान बनाने में मदद मिली है।

श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए शारीरिक रूप से फ़िट, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे युवा ज़रूरी हैं और कहा कि ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ और ‘यूनिवर्सिटी गेम्स’ जैसी पहलों के ज़रिए खेल अवसंरचना को मज़बूत करने के सरकार के प्रयासों के साफ़ नतीजे दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा, “गाँवों और छोटे शहरों से प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है और हमारी बेटियाँ देश का नाम रोशन कर रही हैं।”

रामकृष्ण मिशन के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उनके जीवन का सफ़र इस संगठन से बहुत ज़्यादा प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा, “मेरे सफ़र को, जहाँ से यह शुरू हुआ और जहाँ मैं आज खड़ा हूँ, रामकृष्ण मिशन ने काफ़ी हद तक आकार दिया है। मुझे पहले बेलूर मठ जाने और सम्मानित साधुओं का आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिला था। आज, मैसूरु में रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों का आशीर्वाद एक बार फिर पाना मेरा सौभाग्य है।” मैसूरु को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शहर के मंदिर, परंपराएँ, दशहरा उत्सव, महल, संगीत और साहित्य देश की समृद्ध सभ्यतागत विरासत को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मैसूरु से जुड़ाव उस विरासत का एक अहम अध्याय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह पहले उस ऐतिहासिक इमारत में जा चुके हैं जहाँ विवेकानंद 130 साल से भी पहले शहर की यात्रा के दौरान रुके थे।

उन्होंने कहा कि मैसूर के तत्कालीन महाराजा उन शुरुआती संरक्षकों में से थे जिन्होंने विवेकानंद को वैश्विक ख्याति मिलने से पहले ही उनकी असाधारण सोच को पहचान लिया था। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने अमेरिका से लिखे एक पत्र में महाराजा के समर्थन को स्वीकार किया था।

पिछले साल सेवा के 100 साल पूरे करने वाले रामकृष्ण आश्रम की तारीफ़ करते हुए मोदी ने कहा कि इसने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आपदा राहत के क्षेत्र में लगातार काम करके विवेकानंद के संदेश को ज़िंदा रखा है। उन्हें भरोसा है कि ‘विवेक स्मारक’ ज्ञान चाहने वालों और युवाओं के लिए एक आध्यात्मिक और बौद्धिक केंद्र के तौर पर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को चरित्र, सेवा और देश के प्रति समर्पण को एक साथ लाने के लिए प्रेरित करेगा।

प्रधानमंत्री ने भारत के सबसे साफ़-सुथरे शहरों में लगातार जगह बनाने के लिए मैसूर को बधाई दी और नागरिकों से साफ़-सफ़ाई अभियान को मज़बूत करने, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की। उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि वे स्मार्टफ़ोन के दौर में भी कन्नड़ भाषा में पढ़ने की आदत डालें। साथ ही, उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मैसूर सिल्क, चंदन के उत्पाद और स्थानीय हस्तशिल्प जैसी चीज़ें तोहफ़े में देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी चीज़ें खरीदने से कारीगरों को मदद मिलेगी और भारत की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

श्री मोदी ने कहा कि एक मज़बूत और आत्म-विश्वासी भारत के स्वामी विवेकानंद के सपने को सच करने की ज़िम्मेदारी आज की पीढ़ी की है। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘विवेक स्मारक’ इस राष्ट्रीय मिशन के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनेगा।

 

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