नयी दिल्ली, 31 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत की विकास की अगली लहर केवल बड़े शहरों और प्रयोगशालाओं से नहीं, बल्कि गांवों, छोटे कस्बों और सामुदायिक नवप्रवर्तकों से आयेगी।
डॉ. सिंह ने आज यहां एक कार्यक्रम में जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को देश के औपचारिक नवाचार तंत्र से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थानीय समाधानों को वैज्ञानिक सत्यापन, प्रौद्योगिकी विकास, इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच दिलाकर राष्ट्रीय स्तर के उद्यमों में बदला जाना चाहिए। उनका कहना था कि यही आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने का प्रभावी मार्ग है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में 24 लाख से अधिक स्टार्टअप के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है, लेकिन नवाचार की वास्तविक सफलता तब मानी जायेगी जब तकनीक किसानों, महिलाओं, कारीगरों और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि 25 अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र (एसीआईसी) पहले से कार्यरत हैं और 25 अन्य विकसित किये जा रहे हैं, जिनके माध्यम से अब तक 2,500 से अधिक जमीनी नवप्रवर्तकों को मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, बाजार संपर्क और क्षमता निर्माण का सहयोग मिला है।
उन्होंने अटल नवाचार मिशन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ‘नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशंस’ (एनआईडीएचआई) योजना के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि इससे नवप्रवर्तकों को इनक्यूबेशन, बौद्धिक संपदा संरक्षण, उत्पाद परीक्षण, वित्त और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि किसी नवप्रवर्तक की पहचान उसकी यात्रा का अंत नहीं बल्कि शुरुआत होनी चाहिए। सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साझा प्रयासों से स्थानीय स्तर पर विकसित विचारों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर के उत्पादों में बदला जा सकता है।
