
दमोह। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), दमोह द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत विचारित विशेष प्रकरण में आरोपी मनीराम गौंड, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक, को दोषसिद्ध पाते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 2000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
अभियोजन की ओर से पैरवी प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत द्वारा की गई व सहायक ग्रेड तीन श्री विनय नामदेव द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया।
अभियोजन के अनुसार आरोपी, घटना के समय राजस्व निरीक्षक के पद पर पदस्थ लोक सेवक था। उसने फरियादी पंकज कुमार जैन से उसके राजस्व संबंधी शासकीय कार्य सीमांकन के निष्पादन के एवज में 5,000 की अवैध रिश्वत की मांग की थी, फरियादी पंकज कुमार जैन रिश्वत देना नहीं चाहता था, बल्कि आरोपी को रंगे हाथों पकडवाना चाहता था, जिस हेतु उसके द्वारा 15 मार्च 2022 को लोकायुक्त संगठन, सागर में शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें आरोपी मनीराम गौंड शिकायत का सत्यापन किए जाने के उपरांत लोकायुक्त संगठन द्वारा विधि अनुसार ट्रैप कार्यवाही संपन्न की गई। ट्रैप के दौरान 21 मार्च 2022 को आरोपी के निर्देशानुसार रखी गई रिश्वत राशि बरामद की गई तथा संपूर्ण कार्यवाही स्वतंत्र पंचसाक्षियों की उपस्थिति में संपन्न हुई। वैज्ञानिक परीक्षण व अन्य मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियोजन प्रकरण की पुष्टि हुई।
विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों, पंचसाक्षियों के कथनों तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत माननीय न्यायालय ने अभियोजन का प्रकरण संदेह से परे सिद्ध पाया तथा आरोपी मनीराम गौंड को शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के अंतर्गत दोषसिद्ध पाते हुए 04 वर्ष के सश्रम कारावास से दण्डित किया गया।
