संस्कृति-आधारित यात्रा बनी भारतीयों की पहली पसंद: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (वार्ता) भारतीय यात्री अब दर्शनीय स्थलों की सैर से इतर स्थानीय विरासत, परंपराओं, खानपान, त्योहारों और समाज को करीब से जानने के लिए यात्रा पर जाना अधिक पसंद कर रहे हैं। वैश्विक ट्रैवल ऐप स्काईस्कैनर ने ‘द इंडिया कल्चर ट्रैवल इंडेक्स’ नामक नयी रिपोर्ट में कहा है कि देश में संस्कृति-आधारित पर्यटन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए कराये गये सर्वेक्षण में 84 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे संस्कृति आधारित यात्रा करना चाहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, विरासत और ऐतिहासिक स्थल संस्कृति-आधारित यात्रा के सबसे बड़े आकर्षण बने हुए हैं।

सैंतालीस प्रतिशत भारतीय यात्रियों ने कहा कि वे अपनी यात्रा की योजना ऐतिहासिक और विरासत स्थलों के आधार पर बनाना पसंद करेंगे। केरल, राजस्थान और उत्तराखंड देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल हैं, जो देश की स्थापत्य कला, ऐतिहासिक समुदायों और जीवंत परंपराओं के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं। विरासत पर्यटन की विशेषज्ञ नविना जाफा ने विरासत पर्यटन के लिए पूरा पारितंत्र तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोग जब तक स्थानीय परंपराओं और आयोजनों से खुद को नहीं जोड़ पायेंगे तब तक वे उसकी सच्ची अनुभूति नहीं कर पायेंगे। हर व्यक्ति का एक सपना होता है और पर्यटन उसे उसके सपने को जीने का मौका होना चाहिये।

उन्होंने देश के पर्यटन स्थलों पर शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को ठहरने के लिए एक साफ बिस्तर और उससे भी साफ शौचालय चाहिये। प्रतिभागियों में 46 प्रतिशत ने बताया कि वे पहले ही किसी सांस्कृतिक आयोजन, त्योहार या विरासत यात्रा के लिए विदेश जा चुके हैं, जबकि 43 प्रतिशत भविष्य में ऐसा करने की इच्छा रखते हैं। वहीं 25 प्रतिशत यात्री सांस्कृतिक अनुभवों के लिए अब मेट्रो शहरों की बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं। त्योहारों पर आधारित पर्यटन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

बहत्तर प्रतिशत भारतीय यात्रियों ने कहा कि वे किसी बड़े सांस्कृतिक या धार्मिक उत्सव में शामिल होने के लिए विशेष रूप से यात्रा की योजना बना सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में संस्कृति-आधारित पर्यटन का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। स्काईस्कैनर इंडिया के ट्रैवल ट्रेंड्स एंड डेस्टिनेशंस एक्सपर्ट नील घोष ने कहा, “पहले लोग किसी स्थान का चुनाव करते थे और वहां पहुंचने के बाद उसकी संस्कृति को जानते थे। अब यह प्रक्रिया उलट गयी है। लोग पहले अनुभव चुनते हैं, जैसे दुर्गा पूजा देखना, किसी विरासत मार्ग की खोज करना या स्थानीय भोजन का आनंद लेना, और फिर उसी के अनुसार पूरी यात्रा की योजना बनाते हैं।”

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