भोपाल: राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन दूसरे दिन और तेज हो गया। मूंग की 100% सरकारी खरीदी, एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी, ई-टोकन सिस्टम में सुधार और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने निकले। पुलिस ने वीर सावरकर सेतु के पास बसों की चार लेयर में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक दिया। इस दौरान कुछ किसान बैरिकेडिंग और बसों पर चढ़ गए, जबकि कई किसानों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन किया और सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं ने भी हिस्सा लिया। एक युवती ने कहा कि वह अपने किसान पिता के समर्थन में आंदोलन में शामिल होने आई है और सरकार को किसानों से सीधे संवाद करना चाहिए।
आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सरकारी बसें खड़ी कर रास्ते बंद किए गए। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण नर्मदापुरम रोड, होशंगाबाद रोड और आसपास के क्षेत्रों में लंबा जाम लग गया। हालात को देखते हुए कलेक्टर ने नर्मदापुरम रोड के आसपास के सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश भी घोषित किया।
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ‘किसान कल्याण वर्ष’ मना रही है और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री राकेश सिंह और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति अधिकारियों और किसान संगठनों के साथ संवाद कर समाधान तलाशेगी।फिलहाल किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली वार्ता पर है, जिससे यह तय होगा कि आंदोलन खत्म होगा या आगे और तेज होगा।
