लाइट गुल, रास्ता ठप्प, पैर जमाओ तो कीचड़ में गप

शाजापुर, शाजापुर शहर में इन दिनों लाइट की आंख मिचौली, अंधेरी सडक़ें, कीचड़ के टापू और खामोश खुशी शाजापुर शहर की किस्मत बन गई है. लाइट का आलम यह है कि कभी मेंटेनेंस के नाम पर, कभी आंधी-तूफान के नाम पर कभी भी लाइट चली जाती है, जिसमें रविवार को बिजली विभाग ने मानो कटौती के नाम पर स्थायी परमिट ले लिया हो. वहीं दूसरी ओर शहर में एबी रोड के चौड़ीकरण को लेकर पूरे हाईवे पर कीचड़ का साम्राज्य है. गर्मी में शहरीकरण को पहले दुरुस्त करना था, तो उसे छोडक़र बाहरी क्षेत्र को किया. जब बरसात का सीजन आया, तो शहर में जगह-जगह पाइप लाइन खुदाई के नाम पर कीचड़ से सराबोर है. हाईवे पर दुकानदार परेशान हैं. उनकी दुकान के सामने पाइप लाइन के नाम पर खुदाई कर दी गई है, तो सडक़ें कीचड़ से सराबोर हैं.

गौरतलब है कि शाजापुर शहर में इन दिनों प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे खेत में आ गए हों. पूरे हाईवे पर कीचड़ का साम्राज्य है. कोई सुनने वाला नहीं है. शाजापुर नगर पालिका पाइप लाइन तो जगह-जगह खोद रही है, लेकिन खुदाई के बाद उसे दुरुस्त करने का समय नहीं है. जनता की परीक्षा चल रही है और नेताओं की चुप्पी समझ से परे है. हाईवे पर पैदल चलना भीकिसी स्टंट से कम नहीं है. कब कौन सी गाड़ी फिसल जाए, कब कौन सा गड्ढा किसे अपना शिकार बना ले, कह नहीं सकते हैं. व्यापारी परेशान हैं, क्योंकि कीचड़ से व्यापार ठप्प है. लेकिन इन सबके बीच यदि कोई सबसे बेफिक्र और खुश नजर आता है तो वो है हमारे स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि.

लाइट से हो गए हैं परेशान

एक तरफ मानसून की बेरूखी, दूसरी तरफ बेमौसम, बेसमय लाइट का जाना जनता को परेशान कर रखा है. शनिवार-रविवार तो मानो लाइट बंद करने के लिए स्थायी परमिट मिल गया हो. जब जिला मुख्यालय पर लाइट की ये स्थिति है, तो गांव में तो बिजली का अंदाजा लगा सकते हैं कि वहां क्या हाल होंगे. अधिकारियों को परेशानी न हो, इसलिए शनिवार और रविवार अवकाश के दिन लाइट बंद की जाती है. यदि बिजली विभाग में हिम्मत है, तो वह कार्यालयीन दिवस में लाइट बंद करके देखें. तो अधिकारियों को भी पता चलेगा कि बिना लाइट के जनता कैसे रहती है.

 

सडक़ से कीचड़ हटाना किसकी जवाबदारी

 

बारिश के मौसम में सडक़ निर्माण के बाद कीचड़ की सफाई और सडक़ों की मरम्मत की प्राथमिकता यूं तो नगर पालिका की है, लेकिन नगर पालिका को इससे कोई लेना-देना नहीं है. नेताओं और अफसरों की इस उदासीनता का खामियाजा जनता भुगत रही है. लगता है कि नेता की इस खुशी और जनता की इस परेशानी के बीच का अंतर अब खत्म नहीं होगा. शाजापुर की जनता अपने हक के लिए सडक़ों का कीचड़ साफ करने के लिए एक आंदोलन की आवश्यकता है. अधिकारी और नेताओं को चाहिए कि कागजी समीक्षाओं से बाहर आकर हाईवे पर फैली दलदल की सडक़ों से जनता को निजात दिलाएं.

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