
बालाघाट, जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। ग्राम पंचायत रान-ककोड़ी में पदस्थ पंचायत सचिव सीताराम घोरमारे की उफनते नाले में बहने से मौत हो गई। लगभग 16 घंटे तक चले लगातार सर्च ऑपरेशन के बाद SDRF की टीम ने उनका शव घटनास्थल से करीब 8 किलोमीटर दूर पत्थरों की चट्टानों के बीच से बरामद किया।जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव सीताराम घोरमारे शासकीय कार्य पूर्ण करने के बाद अपनी निजी मोटरसाइकिल से अपने गृह ग्राम गोंडीटोला कोसमारा लौट रहे थे। इसी दौरान पीपलगांव कला और कोसमारा के बीच स्थित नाले पर तेज बारिश के कारण पानी का बहाव काफी बढ़ चुका था। नाला पार करने का प्रयास करते समय उनकी मोटरसाइकिल अनियंत्रित हो गई और वे तेज बहाव में बह गए।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस, राजस्व विभाग, जनपद पंचायत का अमला और SDRF की टीम मौके पर पहुंची तथा युद्ध स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया गया।
मोबाइल चालू होने से जगी थी उम्मीद
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उनके मोबाइल नंबर पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि मोबाइल फोन चालू होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शायद उनका पता चल सके। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम से मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने का भी प्रयास किया गया, ताकि जल्द से जल्द उनका पता लगाया जा सके।
16 घंटे बाद मिला शव
लगातार चले अभियान के बाद 28 जुलाई की सुबह लगभग 8 बजे SDRF की टीम को सफलता मिली। ककोड़ी–भैंसा दोमुहान नाले के कवराघाट क्षेत्र में घटनास्थल से करीब 8 किलोमीटर दूर पत्थरों की चट्टानों के बीच सीताराम घोरमारे का शव फंसा मिला। टीम ने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर शव को बाहर निकाला और पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
क्षेत्र में शोक की लहर
घटना की खबर फैलते ही रान-ककोड़ी, गोंडीटोला कोसमारा, पीपलगांव कला और आसपास के गांवों में शोक का माहौल छा गया। पंचायत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने दिवंगत सचिव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
प्रशासन की अपील
लगातार हो रही बारिश और नदी-नालों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी स्थिति में उफनते नालों, पुल-पुलियों और नदी-नालों को पार करने का जोखिम न उठाएं। थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
