न सांस बची थी न धडक़न, फिर भी भाई-बहन ने मौत को दी मात

सतना : अत्यंत विषैले सांप करैत के काटने के 6 घंटे बाद जब मासूम भाई और बहन को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया तो एक ओर जहां उनकी सांस नहीं बची थी, वहीं दूसरी ओर उनकी धडक़नें काफी कम हो चुकी थीं. हलांकि बच्चों की मरणासन्न स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद मेडिकल टीम पल्ला झाड़ते हुए रेफर भी कर सकती थी. लेकिन ऐसा न करते हुए जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त टीम ने इस केस को चुनौती के तौर पर लेते हुए जान लगा दी. नतीजतन 12 दिन तक जारी रहे उपचार के बाद दोनों भाई बहन स्वस्थ्य होकर वापस घर लौट गए.

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के रैगांव क्षेत्र अंतर्गत करसरा गांव के निवासी एक परिवार में रात के लगभग 3-4 बजे के बीच उस वक्त कोहराम मच गया जब घर की 11 वर्षीय बेटी और 8 वर्षीय बेटे को अत्यंत विषैले माने जाने वाले करैत सर्प ने डस लिया. सर्प ने बेटी को कान पर काट लिया था, जबकि बेटे को पैर पर. जिसे देखते हुए परिजन और पड़ोसी दोनों बच्चों को सबसे पहले झाड़-फूंक कराने के लिए ले गए. लेकिन सांप के जहर के बढ़ते असर के चलते दोनों बच्चों की हालत और बिगड़ती चली गई. कोई रास्ता न देख परिजन दोनों बच्चों को लेकर सुबह के लगभग साढ़े 9  जिला चिकित्सालय पहुंचे.

बच्चों को फौरन ही बच्चों के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया. जब चिकित्सक डॉ. संजीव प्रजापति और डॉ. संदीप द्विवेदी ने दोनों बच्चों की जांच की तो एक ओर जहां सांस नहीं आ रही थी वहीं दूसरी ओर उनकी धकडऩें भी मंद पड़ चुकी थीं. लिहाजा दोनों के बचने की दूर दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी. लेकिन इसके बावजूद भी चिकित्सकों ने अपना फर्ज निभाने का प्रयास शुरु करते हुए तत्काल दोनों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा. इसके बावजूद भी जब शरीर के अंदर आक्सीजन की मात्रा में सुधार नहीं हुआ तो वेंटिलेटर को हाई मोड पर ले जाने के साथ ही उनके फेफड़ों की ताकत बढ़ाने के जतन किए गए.

इसी कड़ी में दोनों बच्चों को आइनोट्रॉपिक सपोर्ट भी दिया गया. वहीं बच्चों की हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. प्रभात सिंह और डॉ. त्रयंबकेश्वर पटेल भी टीम में शामिल होकर जान बचाने में जुट गए. इसी कड़ी में एंटी स्नेक वेनम के 20-20 वॉयल दोनों को लगाए गए. उससे भी बात नहीं बनी तो 5 और वॉयल और उसके बाद फिर से 5-5 वॉयल एएसवी लगाए गए. जबकि इस उम्र के बच्चों के उपचार में समान्यत: 10-15 वॉयल एंटी स्नेक वेनम का उपयोग ही होता है. उपचार के दौरान 5 दिनों तक दोनों बच्चे बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर रहे और बीच बीच में उनके स्वास्थ्य में कई उतार चढ़ाव आए. लेकिन छठवें दिन जब दोनों बच्चें को होश आया तो जहां मेडिकल टीम के बीच नई ऊर्जा का संचार हो गया वहीं परिजनों की खुशी के मारे आंखें छलक आईं.

 केक कटा, बजी तालियां

जिला चिकित्सालय के बच्चों के आईसीयू वार्ड में 12 दिनों तक जारी रहे उपचार के बाद जब दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य हो गए तो बुधवार को उन्हें डिस्चार्ज करने से छोटी से पार्टी की गई. मेडिकल टीम द्वारा दोनों बच्चों से केक कटवाकर उनका मुंह मीठा कराया गया. इस दौरान पीकू वार्ड का गलियारा तालियों से गूूंज उठा. जिसके बाद दोनों बच्चों को कुछ उपहार और ढेर सारी शुभकामनाएं देते हुए घर जाने दिया गया. इस अवसर पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रजापति ने कहा कि मेडिकल टीम ने केवल अपना कत्र्तव्य निभाया. बच्चों की किस्मत अच्छी थी कि उनके उपचार के दौरान वार्ड के 2 सबसे अच्छे वेंटिलेटर खाली थे और इश्वरीय अनुकंपा से दोनों ने मौत को मात दे दी

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