इंदौर: शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है. मामले में पहले गिरफ्तार दो आरोपियों से पूछताछ और बैंक खातों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से 15 मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, सिम कार्ड, स्कॉर्पियो वाहन और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं. जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं.
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी आकाश विश्वकर्मा, प्रवीण पाल और आशीष पुरी साइबर ठगों के लिए फर्जी या किराए के बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे. ये विभिन्न लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर उनकी बैंकिंग किट, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और सिम कार्ड गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाते थे. इन्हीं खातों में शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी गई रकम जमा कर उसे अलग अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था. यह कार्रवाई परदेशीपुरा थाने में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान की गई.
इससे पहले गिरफ्तार आरोपी जय सूर्यवंशी और जतिन हरियाले से पूछताछ तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इन तीनों की भूमिका सामने आई. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों में किया गया. बैंक खातों के विश्लेषण में करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन देन मिले हैं. क्राइम ब्रांच अब संबंधित राज्यों की पुलिस से समन्वय कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है.
आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन देन मिले हैं. जब्त मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच की जा रही है. पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है तथा जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी.
डीसीपी क्राइम, राजेश त्रिपाठी
