सतना : नगर पालिक निगम के जलप्रदाय विभाग की लचर और गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. सूचना के अधिकार से प्राप्त विभागीय दस्तावेजों ने विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. जलप्रदाय विभाग में कुशल और अकुशल श्रेणियों को मिलाकर कुल 155 कर्मचारियों का भारी-भरकम अमला तैनात है. इसके बावजूद शहर की एक बड़ी आबादी बूंद-बूंद शुद्ध पानी के लिए तरस रही है और लोग नलों से आ रहे मटमैले व दूषित पानी को पीने पर मजबूर हैं.
दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने के नाम पर निगम द्वारा विभिन्न संयंत्रों पर कर्मचारियों की फ़ौज तैनात की गई है.
फ़िल्टर प्लांट: जलापूर्ति को स्वच्छ और शुद्ध बनाने के लिए 12 कर्मचारी तैनात हैं.
एनीकट: जल स्रोतों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए 23 कर्मचारी कार्यरत हैं.
पानी टंकियां: शहर की अलग-अलग टंकियों के संचालन हेतु करीब 29 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. जलकर में 5 कर्मचारियों की तैनाती है वही बता दे कि कुल लगभग 69 कर्मचारी अकेले पानी के कार्य में लगे हुए हैं उसके बाद भी शहर को साफ़ पानी नहीं मिल रहा है
अन्य शेष कर्मचारी पाइपलाइन सुधार, वाल्व संचालन और वितरण व्यवस्था के नाम पर कागजों में दर्ज हैं. हर महीने इनके मानदेय के रूप में सरकारी खजाने से लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं.
प्रशासनिक कसावट शून्य, मॉनिटरिंग न के बराबर
155 कर्मचारियों की फ़ौज होने के बाद भी व्यवस्था का यूं चरमराना विभागीय मॉनिटरिंग और प्रशासनिक कसावट की भारी कमी को साफ उजागर करता है. वरिष्ठ अधिकारी दफ्तरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत परखने की ज़हमत नहीं उठाते, जिसका सीधा खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है.
बंगले ड्यूटी पर जल के कर्मचारी
मिली जानकारी के अनुसार 4 कर्मचारियों की ड्यूटी नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर बांग्ला में लगाई गई है जिसमे अकेले 3 कर्मचारी आयुक्त बंगला में लगे हैं.
सवा करोड़ निजी हाथो में
फ़िल्टर प्लांट का करोड़ों रुपए के ठेके दिए जाने के और इतने भारी तादाद मे कर्मचारी तैनात होने पर भी फ़िल्टर प्लांट से शुद्ध पानी रहवासियों को नहीं मिल पा रहा
