इंदौर: प्रदेश सरकार द्वारा जारी ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया’ की अधिसूचना को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई में हाईकोर्ट डबल बेंच ने सरकार सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.पिछली 23 जून को हाईकोर्ट की डबल बेंच में उज्जैन-इंदौर मेट्रो पॉलिटियन एरिया की अधिसूचना को लेकर एडवोकेट अक्षत पहाड़िया ने याचिका दायर कर उक्त अधिसूचना पर सवाल उठाए थे.
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि राज्य एक्ट की धारा 8(1) के तहत ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी’ का गठन किया है. एक्ट की धारा 3 के तहत महानगरीय क्षेत्र को पहले अधिसूचित करना था, लेकिन अधिसूचना को जारी करने में इसका पालन नहीं किया गया. याचिकाकर्ता ने कि इंदौर राज्य की शैक्षिक, व्यावसायिक और औद्योगिक राजधानी है, जबकि उज्जैन एक धार्मिक और आध्यात्मिक शहर है. दोनों शहर एक-दूसरे के पास नहीं हैं. दोनों को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र घोषित नहीं किया जा सकता है. याचिका में 12/6/2026 की जारी अधिसूचना को लेकर सवाल खड़े किए गए है कि ‘मेट्रोपॉलिटन रीजन’ घोषित करने एवं क्षेत्र तय करने से पहले नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत जैसी संवैधानिक संस्थाओं से कोई परामर्श, आपत्ति, सुझाव या ड्राफ्ट प्लान पर चर्चा नहीं की गई.
याचिका में 16,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के गठन की प्रक्रिया, संविधान के 74वें संशोधन के उल्लंघन, और क्षेत्र के नाम (इंदौर का नाम उज्जैन के बाद रखने) पर आपत्ति ली गई है. याचिकाकर्ता एडवोकेट अक्षत पहाड़िया ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तर्क रखे है कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के गठन से जुड़े कानूनी नियमों की अनदेखी की गई है. सवाल उठाया है कि क्या इसके लिए स्थानीय निकायों से उचित सलाह ली गई थी? जस्टिस सुबोध अभ्यंकर एवं जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार सहित सभी संबंधित विभागों को अगली सुनवाई पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा है.
