ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की भूमि संपत्तियों की सुरक्षा के आदेश दिये

भुवनेश्वर, (वार्ता) ओडिशा सरकार ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बीजे पुरी की भूमि संपत्तियों की सुरक्षा, भूमि रिकॉर्ड के रख-रखाव और प्रभावी प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राजस्व अधिकारियों को व्यापक निर्देश जारी किये हैं।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद पाढ़ी ने राजस्व बोर्ड, सभी राजस्व आयुक्तों (आरडीसी), जिलाधिकारियों और भूमि रिकॉर्ड एवं सर्वेक्षण निदेशक (डीएलआरएस) को पत्र लिखकर प्राथमिकता के आधार पर तुरंत कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिये हैं।

श्री पाढ़ी ने कहा कि ओडिशा की पहचान भगवान श्री जगन्नाथ से गहराई से जुड़ी हुई है और प्रभु की सभी संपत्तियों की रक्षा करना नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि प्रभु की भूमि संपत्तियों के रिकॉर्ड, सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर तुरंत ध्यान देने और हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को कानून, सरकारी निर्देशों और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के समय-समय पर दिये गये अदालती आदेशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

सरकार ने खुर्दा, पूरी, जगसिंहपुर, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, गंजाम, कटक और केंद्रपाड़ा जिलों की विभिन्न तहसीलों में एसजेटीए के दायर 11,675 विविध राजस्व मामलों के जल्द से जल्द निपटारे को प्राथमिकता दी है।

निर्देशों में ओडिशा संपत्ति उन्मूलन अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत एसजेटीए के दायर 257 मामलों में राजस्व बोर्ड के सदस्य के पारित आदेशों को तुरंत लागू करने के लिए भी कहा गया है।

जहां भी आवश्यक होगा, 1927-28 के अधिकार अभिलेख (आरओआर) की जांच की जायेगी और खेवट के सुधार के लिए उचित कदम उठाये जायेंगे।

भगवान श्री जगन्नाथ की देवोत्तर संपत्तियों से संबंधित मामलों का फैसला करते समय अधिकारियों को 1888-89, 1925-26, 1927-28, 1929-30 और 1977-78 के बंदोबस्त-पूर्व रिकॉर्ड के साथ-साथ अन्य ऐतिहासिक राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने और कानून के अनुसार देवोत्तर संपत्तियों के सटीक रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि राजस्व बोर्ड के समक्ष मामलों के कुशल संचालन की सुविधा के लिए बंदोबस्त-पूर्व और बंदोबस्त के अधिकार अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां, बंदोबस्त-से-वर्तमान रिकॉर्ड सह-संबंध रिपोर्ट के साथ जल्द से जल्द एसजेटीए को प्रदान की जाएं।

प्रभु की भूमि की पहचान, सत्यापन और सुरक्षा के लिए राजस्व निरीक्षकों, अमीनों और अन्य अनुभवी जमीनी स्तर के कर्मचारियों को तैनात किया जायेगा।

प्रभु की संपत्तियों पर अवैध अतिक्रमण, अनधिकृत कब्जे, फर्जी दावों और निजी हितों के निर्माण के खिलाफ सख्त निगरानी बनाए रखने के लिए नियमित रूप से जमीनी निरीक्षण भी किया जायेगा।

राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जयेगी और जिला, उप-मंडल और तहसील स्तर पर मासिक राजस्व समीक्षा बैठकों के दौरान इनकी नियमित रूप से समीक्षा की जायेगी।

मासिक प्रगति रिपोर्ट भी राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी जायेगी।

राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों को अनावश्यक मुकदमों को कम करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ की संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और कानूनी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश दिये हैं।

 

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