विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
रीवा जोन नशे की गिरफ्त में है .युवाओं को नशे ने जकड़ लिया है. हर तरह के अपराध नशे से होकर ही गुजरते है और इस पर प्रहार करने के लिये जोन के मुखिया ने आपरेशन प्रहार अभियान को मैदान में उतारा. कमजोर मुखबिर तंत्र और कुछ वर्दी धारियों ने अभियान को कमजोर कर दिया. पूरे जोन में आपरेशन प्रहार 2.0 के नीचे एमडी ड्रग्स की कथित फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ, आरोपी भी दबोचे गये. 10 करोड़ से अधिक का ड्रग्स पकड़ा गया. कहीं न कहीं कमजोर मुखबिर तंत्र के कारण पुलिस पहले नहीं पहुंच पाई. सिंघम स्टाइल में काम कर रहे पुलिस अफसर का रेडार ने भी काम नही किया.
महानगरों में बिकने वाला एमडी ड्रग्स मऊगंज और रीवा जिले में बन रहा था. आपरेशन प्रहार के साथ जन चौपाल-आपकी पुलिस आपके द्वार जैसे अभियान गांव-गांव चल रहे थे फिर भी मुखबिरी ड्रग्स की नहीं हुई. इससे साफ है कि पुलिस जनता की मित्र नहीं बन पाई. कहीं न कहीं डऱ के चलते आसपास की अपराधिक घटनाओं को पुलिस से साझा करने में आमजन भय खाते है. कथित एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ और माल के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी निसंदेह काबिले तारीफ है पर पुलिस पर सवाल उठना भी लाजमी है. भोपाल तर्ज पर रीवा जोन में इतना बड़ा रैकेट काम कर रहा था और यहां के खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगी. इसे स्थानीय पुलिस की एक बड़ी चूक ही कहा जाएगा. रीवा में अधिकारी सिंघम बने घूमते रहे और एक इनामी तस्कर को पड़ोसी राज्य की पुलिस शहर से उठा ले गई पर स्थानीय पुलिस को इनामी दूरबीन से खोजने पर भी नहीं मिल रहा था, गजब की पुलिस है.
वायरल चैट से गरमाई सियासत
ग्रामीण विकास विभाग में जिले से लेकर पंचायत स्तर पर किस तरह से पूरा सिस्टम काम करता है यह किसी से छिपा नही है. जब तक न पकड़े जाए तब तक हर कोई ईमानदारी का चोला ओढ़ कर मलाई खाता रहता है. सीधी में प्रभारी मंत्री के दौरे के पहले एक वायरल वाट्सअप चैट से सियासत गरमा गई है. दरअसल जनपद मझौली में जब एक उपयंत्री द्वारा डाटा फीडिंग के लिये फीस जमा करने का मैसेज किया तो हडकम्प मच गया. सोशल मीडिया में वायरल होते ही तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. अंदर चर्चा है कि यह पैसे मंत्री की व्यवस्थाओं के लिये मांगे गये थे. सच्चाई जो भी हो सफाई का दौर भी चलता रहा. एक बात तो साफ हो गई कि किस तरह से पंचायत स्तर पर वसूली होती है. पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि अब भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप ले लिया है. मामला दब जाता लेकिन प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने यह कहते हुए इसे और हवा दे दी कि यह कांग्रेस का सोचा समझा प्लान है. पार्टी को बदनाम करने के लिये. जिसके बाद कांग्रेस भी हमलावर हो गई.
बरगद के नीचे रात में चौपाल
जनता अपनी समस्याओं के लिये प्रशासन की चौखट पर पहुंचती है. सुनवाई में केवल तारीख पर तारीख मिलती है और समस्या वहीं खड़ी रहती है केवल आवेदन का स्वरूप बदलता रहता है. जब से कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी रीवा में पदस्थ हुए है उसके बाद से जनता में एक उम्मीद जगी है. आन स्पाट फैसला करने वाले कलेक्टर इस बार जिले के दूरस्थ सीमावर्ती गांव कूड़ी में जनता से संवाद करने पूरे काफिले के साथ पहुंचे. अपनी स्टाइल में उन्होने बरगद के नीचे रात में चौपाल लगाई.
जहा जनता-जनार्दन की समस्या सुनी भी गई और निराकरण भी हुआ. राज्य चिन्ह बरगद के नीचे घंटों चली चौपाल में खुलकर लोगों ने अपनी समस्या ही नही बताई बल्कि क्षेत्रीय समस्याओं को भी प्राथमिकता से रखा. कलेक्टर का यह अनोखा अंदाज चर्चा का विषय बना है वहीं शासन और प्रशासन के प्रति लोगो के मन में एक विश्वास भी पैदा हुआ है. जनता की समस्या के निराकरण को लेकर निचले अधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारी भी समझनी होगी. नीचे से निराकरण होगा तो ऊपर तक शिकायतें नहीं पहुंचेगी.
