
जबलपुर। लीवर, किडनी और हृदय रोगों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली मानव प्लाज्मा आधारित एक जीवन रक्षक दवा के सैंपल में एचआईवी रिएक्टिव पाये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता प्राइवेट लैब की जांच के आधार पर उक्त दावा कर रहा है। याचिकाकर्ता को सही प्रक्रिया का पालन करते हुए सेम्पल को टेस्टिंग के लिए सरकारी एनालिस्ट के पास भिजवाना था। सिर्फ याचिकाकर्ता की शंका के आधार पर कोर्ट कोेई दिशा-निर्देश जारी नहीं कर सकती है।
नरसिंहपुर निवासी शुभम कौरव की तरफ से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर जबलपुर के नेपियर टाउन स्थित एक मेडिकल स्टोर से ह्युमन एल्वुमिन साल्युशन के तीन एम्पुल खरीदे थे। यह दवा इंजेक्शन के माध्यम से मरीजों को दी जाती है। याचिका में कहा गया है कि दवा लगाने से पहले एहतियात के तौर पर एक एम्पुल की जांच कराई गई, जिसमें कथित रूप से एचआईवी रिएक्टिव रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद संबंधित केमिस्ट को तुरंत सूचना दी गयी। इसकी पुष्टि के लिए उन्नत प्रयोगशाला में दोबारा परीक्षण कराया गया। दूसरी जांच में भी इसकी पुष्टि हुई। याचिका में कहा गया है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए 3 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
युगलपीठ ने अपने फैसले में कहा गया कि याचिकाकर्ता को ड्रग्स अधिकारी के माध्यम से सैंपल लेकर उसे सरकारी लैब में भिजवाना था। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाने के कारण सिर्फ याचिकाकर्ता की शंका के आधार पर कोर्ट को दिशा -निर्देश जारी नही कर सकती है।
