थप्पडक़ांड के बाद पीतांबरा होटल पर निगम का एक्शन

उज्जैन। जयसिंहपुरा स्थित होटल पीतांबरा पर गुरुवार को नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम बुलडोजर लेकर पहुंची। होटल को तोडऩे की तैयारी के बीच पूरे घटनाक्रम ने कई बार करवट बदली। करीब चार घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद नगर निगम ने होटल को ध्वस्त करने के बजाय सील कर दिया।

दरअसल, बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें फायर ब्रिगेड के अधिकारी होटल पीतांबरा में फायर सेफ्टी की जांच के लिए पहुंचे थे। जांच के दौरान दस्तावेज और अनुमति पत्र मांगे गए। इसी बीच होटल संचालक विकास आरोण्या और फायर अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद साहू के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान विकास आरोण्या ने लक्ष्मण प्रसाद साहू को तीन थप्पड़ जड़ दिए। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। विवाद के दौरान कागजात भी काउंटर से उठाकर बाहर फेंक दिए गए और काफी देर तक हंगामा चलता रहा। घटना के बाद नगर निगम ने एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने विकास आरोण्या को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां देर शाम तक परिजन जमानत के प्रयास में जुटे रहे। इसी बीच गुरुवार दोपहर करीब दो बजे नगर निगम का अमला बुलडोजर लेकर होटल पीतांबरा पहुंच गया। कार्रवाई का विरोध करते हुए परिजनों ने कहा कि होटल पर कोई नहीं था और नगर निगम सीधे बुलडोजर लेकर पहुंच गया। उनका कहना था कि यह सरासर नाइंसाफी है और थप्पड़ मारने की घटना का बदला लिया जा रहा है। टीआई गगन बादल एवं पुलिस बल ने होटल संचालक की बहन को होटल के सामने से हटाने का प्रयास किया, तो वह जेसीबी के सामने खड़ी हो गई और कार्रवाई का विरोध करने लगी। महिला पुलिसकर्मियों को बुलाकर मां-बेटी को मौके से हटाने के लिए डायल-112 की सहायता ली गई। दोनों को वहां से रवाना किया गया।

 

नोटिस नहीं मिला

इस बीच शहरभर में यह चर्चा भी रही कि नगर निगम के अधिकारी के साथ अभद्रता और मारपीट की घटना के बाद नगर निगम होटल को ध्वस्त नहीं कर पाया। बताया जा रहा था कि होटल को तोडऩे के लिए नोटिस जारी किया गया था, जबकि होटल संचालक के परिजनों का कहना है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। अधिकारियों का कहना था कि नोटिस चस्पा कर दिया गया था, वहीं परिजनों ने मौके पर नोटिस की प्रति मांगी, जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

 

कलम बंद हड़ताल

 

पूरे घटनाक्रम के दौरान यह चर्चा भी होती रही कि जब नगर निगम की टीम जेसीबी और पोकलेन लेकर मौके पर पहुंची थी तो होटल को ध्वस्त करने की कार्रवाई आखिर क्यों नहीं की गई। दूसरी ओर नगर निगम कार्यालय में इंजीनियरों एवं कर्मचारियों ने लक्ष्मण प्रसाद साहू के साथ हुई मारपीट का विरोध करते हुए नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल भी शुरू कर दी। एक ओर नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन चलता रहा तो दूसरी ओर होटल पर कार्रवाई अंतत: होटल को सील कर दिया गया।

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