
सीधी। शहर में छत्रसाल स्टेडियम के समीप संचालित आदिवासी बालक छात्रावास क्रमांक 1 सीधी में अप्रैल माह में एक दिन भी मेस का संचालन नहीं किया गया, लेकिन अब अप्रैल माह की भी शिष्यावृति की राशि के आहरण के लिए छात्रावास के अधीक्षक राकेश रावत द्वारा अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
बताया गया कि आदिवासी बालक छात्रावास क्रमांक 1 सीधी में मीनू के आधार पर छात्रों को नास्ता एवं भोजन नहीं दिया जाता है। खास बात यह है कि गत अप्रैल महीने में एक दिन भी मेस का संचालन नहीं किया गया है। कोई भी छात्र छात्रावास में उपस्थित नहीं था सभी अपने घर गए हुए थे लेकिन छात्रावास के अधीक्षक राकेश रावत द्वारा पूरे महीने छात्रों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर अब राशि आहरित करने के प्रयास कर रहे हैं। जबकि अप्रैल माह में विभाग के अधिकारियों के द्वारा भी निरीक्षण किया गया था जिसमें पाया गया था कि उक्त छात्रावास में अप्रैल माह में मेस का संचालन पूरी तरीके से बंद है, ऐसी स्थिति में शिष्यावृति की राशि का भुगतान किया जाना संभव नहीं है।
आदिवासी बालक छात्रावास क्रमांक 1 सीधी के अलावा करीब 20 की संख्या में और ऐसे छात्रावास हैं जो निरीक्षण के दौरान बंद पाए गए थे जिनकी भी राशि का भुगतान लंबित है। अब ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त अधीक्षक फर्जी तरीके से राशि आहरित कराने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
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अधिकारी का खास होने का दबाव
बताया गया कि आदिवासी विकास विभाग में जोधा सिंह ऊइके के पदस्थ होने के बाद ही आदिवासी बालक छात्रावास के अधीक्षक राकेश रावत के द्वारा मनमानी शुरू कर दी गई है। नियमानुसार छात्रावास का संचालन करने के बजाय पूरी तरीके से मनमानी की जा रही है। ना तो छात्रावास में रात्रि के समय विश्राम करते हैं और ना ही कोई व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता है । बताया गया कि अपने आप को सहायक आयुक्त का खास बताकर नियम विरुद्ध कार्य किये जाते है । राकेश रावत अधीक्षक छात्रावास मनमानी पर उतारू है और छात्रों के लिए आने वाली राशि पर डाका डाल रहे हैं।
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इनका कहना है
तत्कालीन परियोजना प्रशासक एस.एन.द्विवेदी के द्वारा टीम के साथ आदिवासी बालक छात्रावास क्रमांक 1 सीधी का अप्रैल माह में निरीक्षण किया गया था। जिसमें मेस का संचालन बंद पाया गया था एवं छात्रावास में एक भी छात्र उपस्थित नहीं थे, जिसका प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है।
बृजेन्द्र बुनकर, सीईओ आदिवासी विकास विभाग सीधी
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