सतना: शहर में पिछले एक सप्ताह से हो रही लगातार दूषित और गंदे पानी की सप्लाई ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है. वाटर फिल्टर प्लांट से अशुद्ध पानी की सप्लाई किए जाने के मामले में आखिरकार नगर निगम प्रशासन ने बड़ी लापरवाही मानते हुए गाज गिरा दी है. निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए जल प्रदाय अधिकारी रोजल सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. शहर की चरमराई जलापूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाने का जिम्मा अब प्र. कार्यपालन यंत्री राहुल पटेल को सौंपा गया है. इसके साथ ही दैनिक पानी की आपूर्ति की कड़ाई से निगरानी, पेयजल की शुद्धता की जांच और स्कॉडा रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा करने के लिए उपयंत्री अतुल सिंह को प्रभारी नियुक्त किया गया है.
वहीं अगर सरकारी कागजों पर नजर डालें तो नगर निगम के लगभग 155 कर्मचारी शहर की पानी आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए तैनात हैं और इन कर्मचारियों को बाकायदा निगम की ओर से दैनिक भत्ता भी दिया जा रहा है.लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है क्योंकि हफ़्तों से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह 155 कर्मचारियों की फौज किस जगह और क्या कार्य कर रही है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जब शहर की जल प्रदाय व्यवस्था का कार्य पहले ही एक निजी कंपनी को ठेके पर दिया जा चुका है, तो फिर निगम के इतने सारे कर्मचारियों को किस बात का भुगतान किया जा रहा है. निगम के 155 कर्मचारियों के भारी-भरकम अमले और निजी ठेकेदार की मौजूदगी के बावजूद शहरवासियों को सप्ताह भर से गंदा और बदबूदार पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
इनका कहना
वाटर फ़िल्टर प्लांट की समस्या बनी हुई है दो से तीन दिन बाद पुनः शुद्ध पानी की सप्लाई हो जाएगी
शेर सिंह मीना
आयुक्त नगर निगम
