पद्म विभूषण डॉ तीजन बाई का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तथा पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी संख्या में उमड़े लोगों, लोक कलाकारों, शिष्यों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

गृहग्राम गनियारी स्थित मुक्तिधाम में हुए अंतिम संस्कार के दौरान पारंपरिक श्रद्धांजलि स्वरूप लोक कलाकारों और उनके शिष्यों ने “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गीत गाकर वातावरण को भावुक कर दिया। अंतिम संस्कार की रस्म उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि देकर पूरी की। इस अवसर पर उनके पति तुलसी राम देशमुख भी उपस्थित रहे। परिजनों के अनुसार डॉ. तीजन बाई की अंतिम इच्छा थी कि वह सुहागिन के रूप में ही इस संसार से विदा लें।

अंतिम दर्शन के लिए कला, साहित्य और राजनीति जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां गनियारी पहुंचीं। इनमें पद्मश्री उषा बारले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार और उनके शिष्य शामिल रहे। सभी ने दिवंगत लोकगायिका को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें अंतिम प्रणाम किया।

डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और लोककला के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने पंडवानी गायन को अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। उनके निधन को लोककला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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