
सीधी । शासन की अदूरदर्शिता से करोड़ों के बने सामुदायिक शौंचालय संचालन की व्यवस्था के अभाव बंद पड़े हैं। करोड़ों के सामुदायिक शौंचालय तालों में कैद हैं।
गौरतलब है कि सीधी जिले में करोड़ों की लागत से बनाये गये करीब 2 सैकड़ा सामुदायिक शौंचालय बनने के साथ ही तालों में कैद होकर रह गये। उपयोगिता न हो पाने के कारण कुछ सामुदायिक शौंचालय जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ताले में सामुदायिक शौंचालयों को कैद करके रखना था तो बनवाया ही क्यों? स्वच्छता मिशन के जिम्मेदार अधिकारी इस पर विषय को लेकर गंभीर भी नहीं दिख रहे।
शहर के सार्वजनिक स्थलों में बनाये जा रहे सुलभ शौंचालयों की तर्ज पर ग्राम पंचायतों में मुख्य सडक़ों के किनारे सार्वजनिक शौंचालयों का निर्माण कराया गया था। यह शौंचालय ग्राम पंचायतों के बाजार क्षेत्र व बसाहट वाली बस्तियों में कराया गया है ताकि सार्वजनिक स्थलो में खुले में शौंच जाने की समस्या का निराकरण हो सके।
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संचालन के लिये पंचायतों के पास नहीं है बजट
सीधी जिले में 221 ग्राम पंचायतों का चयन सामुदायिक शौंचालयों के निर्माण के लिये किया गया। इनमें करीब 2 सैकड़ा का निर्माण हो चुका है। सामुदायिक शौंचालयों का संचालन न होने का मुख्य कारण पंचायतों के पास बजट न होना है। बिजली बिल, सफाईकर्मी का वेतन एवं अन्य खर्चों के लिये सामुदायिक शौंचालयों का उपयोग करने पर 5 रूपये का शुल्क रखा गया था।
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इनका कहना है
जिले में बने सामुदायिक शौचालय कुछ स्थानों में संचालित है। बंद पड़े अन्य सामुदायिक शौचालय के सुचारु रूप से संचालन हेतु योजना तैयार की जा रही है। जिनके संचालन की जिम्मेदारी पंचायत के माध्यम से इच्छुक स्व सहायता समूहों एवं निजी व्यक्तियों को दिया जायेगा।
शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, सीईओ जिला पंचायत सीधी
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