सिर्फ पुराना रिकार्ड आधार नहीं, मौजूदा केस के साक्ष्य भी देखें: हाईकोर्ट

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने चोरी के एक मामले में आरोपित को नियमित जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि केवल किसी आरोपी का लंबा आपराधिक रिकार्ड होने भर से जमानत स्वत: निरस्त नहीं की जा सकती। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि वर्तमान मामले में उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं। कोर्ट ने बैतूल निवासी अमन उर्फ चमन की पहली जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शंतनु तिवारी ने दलील दी कि आरोपी के विरुद्ध 17 पुराने मामले जरूर दर्ज हैं, लेकिन मौजूदा प्रकरण में अभियोजन का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य पहचान का है। घटना देखने वाले गवाहों से पुलिस ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड ही नहीं कराई, जिससे आरोपी की पहचान संदेहास्पद हो गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रभाकर तिवारी प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि मात्र आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य ने जमानत का विरोध किया, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी 31 मार्च 2026 से जेल में है, मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है व पहचान संबंधी साक्ष्य पर प्रथमदृष्टया प्रश्न खड़े होते हैं। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने नियमित जमानत मंजूर कर ली।

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