भोपाल। मध्य प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित आदिवासी स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में विलय करने के प्रस्ताव पर नया मोड़ आ गया है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि इन स्कूलों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ही संचालित रखा जाए।
पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा केवल शैक्षणिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय परिस्थितियों से भी गहराई से जुड़ी है। ऐसे में इन स्कूलों का संचालन जनजातीय कार्य विभाग के माध्यम से ही अधिक प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने विभागीय बदलाव से आदिवासी छात्रों के हित प्रभावित होने की आशंका भी जताई है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधार और शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल करने की संभावना पर विचार कर रही थी। इस प्रस्ताव का आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने लगातार विरोध किया है।
राज्यपाल के पत्र के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है। माना जा रहा है कि सरकार अब इस प्रस्ताव की दोबारा समीक्षा कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यदि राज्यपाल की सलाह को स्वीकार किया जाता है, तो आदिवासी स्कूल पूर्ववत जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ही संचालित होंगे। वहीं, यदि विलय की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इस पर व्यापक विमर्श और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की संभावना रहेगी।