सतना:जिला अधिवक्ता संघ चुनाव में कुल 43 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं.अध्यक्ष पद के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में हैं,लेकिन मतदान के दो दिन पूर्व जो तस्वीर उभर कर सामने आयी है.उसमें स्पष्ट नजर आ रहा है कि चुनाव में मुकाबला दो पूर्व अध्यक्षों के बीच में ही होगा.गौरतलब है कि साढ़े सत्रह सौ सदस्य संख्या वाले जिला बार में नियमित प्रक्टिस करने वाले कम और पंजीयन करने वालों की संख्या ज्यादा है.पहली बार ऐसा देखने में आया है कि चुनाव के प्रमुख प्रत्याशी जिला कचहरी में अधिवक्ताओं से सम्पर्क करने के वजाए व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर रहे हैं.हालांकि अध्यक्ष के जो प्रत्याशी नियमित रूप से अदालती कार्रवाई में शामिल होते हैं,वे प्रक्टिस में आने वाले वकीलों से सम्पर्क बना रहे हैं.
जानकारों की माने तो अधिवक्ता संघ चुनाव में रणनीतिक तौर पर जो बिसात बिछाई गई है उसकी जमीन कुछ लड़ाकों ने काफी पहले से ही तैयार कर रखी थी.इसका अन्दाजा लोगों को चुनाव शुरू होने के बाद लगा.पूर्व अध्यक्ष सुनील शर्मा ने शेष अध्यक्ष के प्रत्याशियों के सामने ऐसी परिस्थिती पैदा कर दी है कि हर दावेदार अपना मुकाबला उन्ही से मान रहा है.दूसरी तरफ पूर्व अध्यक्ष आर बी सिंह ने भी इस बार अपनी दावेदारी पिछली बार हुई चूक को सुधारते हुए की है.
उन्होने कचेहरी में अपने प्रचार अभियान को सीमित रखते हुए अपने मतदाताओं से सीधे सम्पर्क किया है.शेष दावेदारों में रमेश पाठक निवृत्तमान अध्यक्ष के पुत्र है.इस वजह से उन्हे भी काफी महत्व मिल रहा है.बार के कई पदों पर पूर्व में चुनाव जीत चुके अमृत लाल शुक्ला भी किसी से कमजोर नजर नहीं आ रहे हैं.पूर्व वरिष्ठ अधिवक्ता स्व.रामगोपाल श्रीवास्तव के पुत्र रत्नेश श्रीवास्तव पहली बार चुनाव मैदान में हैं.इसके अलावा पुष्पराज सिंह,ददन सिंह परिहार और प्रदीप पाण्डेय चुनाव मैदान में उतरे हैं.
नए मतदाताओं का रूख अस्पष्ट
पिछले दो वर्ष के दौरान जिला बार में अधिवक्ताओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.ज्यादातर वरिष्ठ प्रत्याशी नए मतदाताओं के रूख को लेकर संशय में हैं.उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी त्वरित घटनाक्रमों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाती है.ऐसे में उनका वोट किसे और किस आधार पर मिलेगा यह स्पष्ट नहीं है.हालांकि जिन चेम्बरों से उनका जुडवा है.उनके सीनियर यही मान कर चल रहे हैं कि उनका जूनियर उन्ही के कहने पर वोट देगा.
नान प्रक्टिसनर निर्णायक
पिछले कई चुनावों से जिला बार में नियमित तौर पर नहीं आने वाले अधिवक्ता ही यह तय करते आ रहे हैं कि बार का अध्यक्ष कौन होगा.बताया जाता है कि इस बार ऐसे सदस्यों की संख्या पहले की अपेक्षा आधे-आधे की हो गई है.ज्यादातर प्रत्याशियों ने उनसे सम्पर्क करने की कोशिश की है.इसके बावजूद दस प्रतिशत ऐसे मतदाता भी हैं जिनका सम्पर्क कुछ ही लोगों से है
