नयी दिल्ली 01 जुलाई (वार्ता) भारत एवं पाकिस्तान के कई प्रमुख लोगों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से “दक्षिण एशिया में शांति, सामान्य स्थिति, बातचीत और सहयोग बहाल करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने की अपील की है।
दोनों देशों के 117 लोगों के हस्ताक्षर वाले इस संयुक्त पत्र में राजनयिक संबंध बहाल करने, व्यवस्थित बातचीत, भरोसे को मज़बूत करने वाले लगातार उपाय करने और दोनों देशों के बीच दुश्मनी कम करने तथा शांति को बढ़ावा देने के लिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की मांग की गई है। इस पत्र पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 लोगों ने हस्ताक्षर किये हैं।
पत्र में दोनों सरकारों से सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है जिसमें राजनयिक संबंधों की पूरी तरह बहाली, राजधानी दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की फिर से नियुक्ति और दोनों देशों के नागरिकों के लिए नियमित वीज़ा सेवाएं फिर से शुरू करना शामिल है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत फिर से शुरू करने की भी मांग की है और 2004-2007 के बातचीत के ढांचे पर फिर से विचार करने का सुझाव दिया है।
पत्र में तनाव कम करने, सैन्य तैनाती घटाने और लगातार बातचीत की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है, साथ ही दोनों पक्षों की “उचित सुरक्षा चिंताओं” को भी ध्यान में रखने की बात कही गयी है। पत्र में कहा गया है कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण लाखों लोग विशेषकर युवा विकास, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य के मौकों से वंचित हो रहे हैं। इसमें कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा हैं, और यहां के लोगों का भविष्य अविश्वास और टकराव के बजाय शांति, कनेक्टिविटी और सहयोग से तय होना चाहिए।
उन्होंने व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा सीमा फिर से खोलने, श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा बहाल करने और यात्रा का समय एवं खर्च कम करने के लिए वाणिज्यिक उड़ानों के वास्ते हवाई सीमा खोलकर हवाई संपर्क बढ़ाने का आग्रह किया है। उन्होंने करतारपुर साहिब गलियारे को फिर से शुरू करने तथा पाकिस्तान की नीलम घाटी में शारदा पीठ तक पहुंच आसान बनाने के साथ-साथ सीमा के दोनों ओर धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों तक व्यापक पहुंच की भी अपील की है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले भारतीयों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती, राजद सांसद मनोज झा, कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर और रॉ के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत शामिल हैं। पाकिस्तान की तरफ़ से दस्तख़त करने वालों में पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, राजनयिक अशरफ़ जहांगीर काज़ी, नेशनल असेंबली के सदस्य इस्फ़ानयार भंडारा और वैज्ञानिक परवेज़ हुदभाई शामिल हैं।
‘सेंटर फ़ॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ की ओर से यह पहल ऐसे समय पर हुई है जब सीमा पार आतंकवाद और पहलगाम हमले जैसी हालिया घटनाओं को लेकर तनाव बना हुआ है। सिंधु जल संधि स्थगित करने के भारत के फ़ैसले के बाद पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते और बिगड़ गए।
इस्लामाबाद में इंटरनेशनल इंडस वाटर्स ट्रीटी कॉन्फ़्रेंस में बोलते हुए, पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कथित तौर पर भारत को “1960 की संधि को कमज़ोर करने की कोशिशों” के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि साझा नदियों का इस्तेमाल कभी भी “हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए” और चेतावनी दी कि पानी के बहाव में रुकावट डालने वाला कोई भी कदम क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन सकता है।
भारत के इस रुख़ का ज़िक्र करते हुए कि सीमा पार आतंकवाद के चलते पाकिस्तान से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती, अधिकारियों ने दोहराया कि सार्थक बातचीत तभी संभव है जब माहौल आतंकवाद-मुक्त हो, पाकिस्तान आतंकवादी ढांचे के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करे और भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए भरोसेमंद आश्वासन दे। उनका कहना है कि भारत बातचीत का समर्थन तभी करता है जब संयम बरतने और आतंकवाद-मुक्त माहौल के स्पष्ट सबूत हों, जिससे स्थिर और सार्थक रिश्ते बन सकें।
