
बड़वानी।एक ओर सरकार योजनाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के दावे कर रही है। दूसरी तरफ सिस्टम के एक तकनीकी बदलाव ने जिले के 72 हजार 57 बेसहारा लोगों के मुंह का निवाला छीन लिया है। जिन बुजुर्गों, विधवाओं और निशक्तों का पूरा जीवन सिर्फ 600 रुपए महीने की पेंशन पर टिका है, वे पिछले चार महीने से एक-एक पैसे के लिए मोहताज हैं। कारण पेमेंट का गेटवे बदलना बताया जा रहा है। लेकिन यह प्रक्रिया इतनी धीमी है कि जिले के 72057 लोगों के करीब 4.32 महीने के अनुसार पिछले 4 महीने की 17.29 करोड़ रुपए से अधिक पेंशन राशि अटकी हुई हैं। हालात यह है कि बुजुर्ग हर महीने 5 से 6 बार बैंक की चौखट पर सिर्फ यह आस लेकर पहुंचते हैं कि शायद उनके खाते में 600 रुपए आ गए हो, लेकिन हर बार खाली पासबुक देखकर उनकी उम्मीदें टूट जाती है। इसके बाद शुरू होता है सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का सिलसिला, जहां से उन्हें सिर्फ इंतजार करने की नसीहत मिलती है।
जिले में सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 12 प्रकार की पेंशन योजनाएं संचालित हैं, जिनसे 96267 लोगों को हर माह करीब 5.77 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बांटी जाती हैं। प्रदेश सरकार की 9 योजनाओं की राशि तो हितग्राहियों तक पहुंच रही है, लेकिन पेंच केंद्र सरकार की तीन योजनाओं में फसां है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन से 50302, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन से 19674 और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निशक्त पेंशन से 2081 लोगों को हर माह 600-600 रुपए मिलते हैं। इन्हीं तीनों योजनाओ की राशि 43234200 रुपए अटकी हुई है।
जमीनी हकीकत जो सिस्टम को नहीं दिखती
75 वर्षीय रामसिंह अकेले रहते हैं। जीवन का इकलौता सहारा पेंशन है, लेकिन पिछले चार माह से यह बंद है। अब जर्जर शरीर और लाठी के सहारे दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। शहर के ही 80 वर्षीय रमिला बाई की आंखों की रोशनी ढलती उम्र के साथ कम हो गई है। ऐसे वक्त में जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत है, उनकी पेंशन भी चार माह से अटकी हुई है। वहीं शहर की एक 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला का दर्द किसी को भी झकझोर सकता है। चार माह से पेंशन नहीं आई, तो पेट की आग बुझाने के लिए इस उम्र में वे लोगों के घरों में बर्तन मांजने के लिए मजबूर हैं।
जल्द मिलेगी पेंशन राशि
पेमेंट गेटवे चेंज हो रहा है, जिसके कारण केंद्र की पेंशन योजनाओं की राशि फरवरी महीने से अटकी है। उच्च अधिकारियों ने वीसी में इस माह तक सुधार होकर जल्द हितग्राहियों के खातों में राशि पहुंचने का कहा है।
रौनक सोलंकी, उपसंचालक सामाजिक न्याय विभाग बड़वानी
तकनीकी खामी का दे रहे हवाला
शिकायतों का अंबार, समाधान नदारद पेंशन न मिलने के कारण भूखे मरने की नौबत तक पहुंच चुके लोग हर सप्ताह जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुंच रहे हैं। हर मंगलवार 5 से 10 शिकायतें सिर्फ इसी मुद्दे की होती हैं। वहीं सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायतों का आंकड़ा 100 के करीब पहुंच चुका है। बावजूद इसके तकनीकी खामी का हवाला देकर लोगों को वापस लौटा दिया जाता है।
