भोपाल के सरकारी अस्पतालों में हीमोफीलिया इंजेक्शन का संकट; भटक रहे मरीज, बढ़ी चिंता

भोपाल: सरकारी अस्पतालों में हीमोफीलिया मरीजों के लिए जरूरी फैक्टर इंजेक्शन का स्टॉक खत्म होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। यह इंजेक्शन हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अचानक होने वाले रक्तस्राव को रोकने में इसकी अहम भूमिका होती है।
जानकारी के अनुसार, जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल और एम्स जैसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में फिलहाल इस जीवन रक्षक इंजेक्शन की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में मरीजों को दवा के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें आपात स्थिति में तुरंत इंजेक्शन की जरूरत होती है।
दवा की कमी के कारण कई परिवार निजी मेडिकल स्टोर्स से इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं, जहां इसकी कीमत 8 हजार से 13 हजार रुपये प्रति इंजेक्शन तक पहुंच रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। इससे कई मरीजों का नियमित इलाज भी प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नए स्टॉक की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया जारी है। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों का सवाल है कि जब यह जीवन रक्षक दवा है, तो इसकी उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई। फिलहाल इंजेक्शन की कमी ने राजधानी में हीमोफीलिया मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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